अंडरग्राउंड बिजली सेवा: केवल 15 प्रतिशत को लाभ, 2 करोड़ के लिए 70 करोड़ का खर्च बेकार

    अमरावती. समूचे शहर में बिजली तारों को भूमिगत कर ग्राहकों को अखंडित सेवा देने के लिए 5 वर्ष पूर्व केंद्र सरकार ने आईपीडीएस योजना अंतर्गत 70 करोड़ रुपए खर्च किए. इस योजना के अंतर्गत 15% क्षेत्र में ही भूमिगत तारों द्वारा बिजली आपूर्ति किए जाने से अन्य क्षेत्रों को लगातार खंडित बिजली सेवा का सामना करना पड़ रहा है. 70 करोड़ खर्च करने के बाद भी अखंडित सेवा नहीं मिलने से बारिश आने और हवा के झोंके से भी बिजली आपूर्ति खंडित हो जाती है. अधिकारियों की माने तो केवल 2 करोड़ रुपए के लिए इस योजना का काम अभी तक अटका पड़ा है.

    हवा आई और बिजली गई का सिलसिला बदस्तूर 

    बारिश का मौसम शुरू हुआ कि शहर के कई क्षेत्रों में लगातार बिजली गुल हो जाती है. जिससे नागरिक भी त्रस्त होते हैं. जरा सी बारिश और हवा आने पर बिजली आपूर्ति खंडित हो, इसीलिए बिजली तारों को भूमिगत करने के लिए 5 वर्ष पूर्व आईपीएस योजना के माध्यम से शहर के भूमिगत बिजली वाहिनी का काम किया जा रहा था, लेकिन हाथी गया और पूछ रहे गई की तर्ज पर इस योजना का काम हुआ है.

    900 किलोमीटर से अधिक बिजली वाहिनी को भूमिगत करना था, लेकिन अभी तक 100 मीटर ही बिजली वाहिनी भूमिगत कर उसे जोड़ा जा सका है. शहर में 80 से 85% क्षेत्र में पोल से बिजली आपूर्ति की जाती है. यह जोड़ने के लिए 2 करोड़ रुपए का खर्च है. डेढ़ वर्ष से यह कनेक्टिविटी नहीं हो पाने के कारण मात्र 15% क्षेत्र में ही भूमिगत बिजली तारों द्वारा बिजली सप्लाई की जाती है.

    एक साल से नहीं मिली निधि 

    केबल भूमिगत डालने के काम के लिए अलग निधि था, लेकिन जो काम शेष बचा है. उसके लिए दो करोड़ का खर्च है. वह निधि अभी तक प्राप्त नहीं होने से वरिष्ठ कार्यालय को निधि प्राप्त के लिए रिपोर्ट भेजी है. निधि प्राप्त होने के बाद भूमिगत अंडरग्राउंड बिजली तारों का काम किया जाएगा.-सुचित्रा गुर्जर, मुख्य अभियंता 

    योजना का काम पूर्ण हुआ 

    आईपीडीएस योजना अंतर्गत शहर के भूमिगत केबल के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी काम किया है. शहर के क्षेत्रों में एबी केबल डाले गए. योजना डेढ़ वर्ष पहले ही पूर्ण हो चुकी है. योजना में शहर के बिजली तारों को भूमिगत कर दिया है. कुछ जगह पर जोड़ने का काम बाकी है, यह काम हमारे विभाग के पास नहीं था.