Market Parvana incurs loss of 2.50 crores, losses in Corona

अमरावती. महानगरपालिका पहले ही आर्थिक तंगी से जुझ रही है. खर्च कम करने की बजाए वह बढता ही जा रहा है. ऐसे में लगातार तीन चार माह से पेट्रोल के पैसे नहीं मिलने के चलते पेट्रोल पंप मालिक ने भी पेट्रोल देने से इंकार कर दिया. जब महापौर चेतन गांवडे का वाहन पेट्रोल पंप पर पहुंचा तो बकाये की राशी 80 लाख रुपयों तक पहुंचने से पेट्रोल नहीं दिया जाये ऐेसे आदेश होने की बात कर्मियों ने कहीं. परिणामत: महापौर को स्वयं के पैसों से गाडी में पेट्रोल भरवाना पडा

आय बढाने पर जोर ही नहीं
महानगरपालिका में भाजपा की सत्ता है. दौरान केंद्र व राज्य में भी भाजपा की सत्ता थी. बावजूद इसके 3 वर्षों में एक बार भी मनपा का कर्जा कम हो अथवा आर्थिक रुप से सहारा देने का काम कभी भी नहीं किया गया. यहां के जनप्रतिनिधियों ने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस से कभी भी मनपा को आर्थिक निधि उपलब्ध कराने का प्रयास नहीं किया.

हालांकि कुछ ही चुनिंदा जनप्रतिनिधियों ने निधि खिंच लायी लेकिन वह भी केवल अपने अपने प्रभाग के कामों को पूर्ण करने लेकिन आर्थिक स्थिति सुधरने का प्रयास नहीं हुआ. जैसे तैसे संपत्ती टैक्स असेसमेंट को लेकर प्रयास किया जिसमें राज्य स्तर पर कंपनी नियुक्त किये जाने से वह भाग खडी हुई. परिणामत: आय बढाने किसी भी तरह का प्रयास नहीं किया. ऐसे में कोरोना ने आघात कर मनपा को आर्थिक चौपट ही कर दिया कि अब पेट्रोल भरवाने के लिए भी पैसे नहीं है.

10 का धनादेश दिया
कुछ तकनीकि कारणों के चलते पेट्रोल पंप का पेमेंट नहीं हो पाया.चार पाच माह से 80 लाख रुपये का बकाया था. कोरोना और उसके बाद लेखाधिकारी नहीं रहने से यह दिक्कतें हुई अब 10 लाख रुपये का धनादेश दिया है. जिसके बाद पेट्रोल देना शुरु कर दिया है.- सुरेश पाटिल, उपायुक्त

प्रशासन का ध्यान ही नहीं
वाहन पेट्रोल पंप क सामने खडा करते ही बकाये की जानकारी हुई. तब जाकर प्रशासन से संपर्क किया तो इतने बडे पैमाने पर बकाया होने की बात पता चली. कोरोना से प्रशासन का ध्यान ही नहीं था. लेकिन इस तरह भी कामकाज नहीं होना चाहिए कि महापौर को ही सभी और ध्यान देना पडे.- चेतन गांवडे महापौर