माहेरघर योजना से दूर हो रही महिलाएं

  • मेलघाट में माता मुत्यु रोकने योजना विफल

अचलपुर. आदिवासी दुर्गम क्षेत्र मेलघाट में माता मृत्यु रोकने के लिए सरकार द्वारा माहेर घर योजना चलायी जा रही है. यहां के 9 प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों के माध्यम से योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है. लेकिन योजना को यहां की गर्भवति महिलाओं प्रतिसाद ना मिलने से योजना लगभग फेल हो गई है.  

प्रसूति के 5 दिन पहले किया जाता दाखिल

कुपोषण, बाल व माता मृत्यु के लिए पहचाने जाने वाले मेलघाट में गर्भवति माताओं के लिए जारी योजना के तहत गर्भवतियों महिलाओं को प्रसूति से 4 से 5 दिन पहले ही स्वास्थ्य संस्थाओं में दाखिल करना, उनकी देखभाल व सुरक्षित मातृत्व प्रदान करना यह लक्ष्य है, लेकिन महिलाओं के मामूली प्रतिसाद के कारण योजना सफल नहीं हो रही है. ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कें खराब होने, संचार की व्यवस्था न होने इस योजना में बाधा बन रही है. 

दी जाती है मजदूरी

मेलघाट के दुर्गम गांव में समय पर एम्बुलेंस ना पहुंच पाने के कारण व स्वास्थ्य सेवा की कमी के चलते प्रसूति के दौरान भारी दिक्कतें आती है. इसी के तहत माहेर घर योजना में प्रसूति से 4-5 दिन पहले दाखिल करने का प्रावधान है. गर्भवतियों को उनकी मजदूरी के 200 रुपए रोज भी दिए जाते है. 

योजना नहीं हो रही सफल

माहेरघर योजना सुरक्षित प्रसूति के लिए आवश्यक है. बाल व माता मृत्यु रोकने के लिए यह एक बड़ा कदम है. योजना के तहत महिलाओं की मजदूरी न रुके इसके लिए उनकी मजदूरी के रुपए भी उन्हे दिए जाते हैं. लेकिन योजना को महिलाओं का अल्प प्रतिसाद है. जिजसे योजना सफल  नहीं हो रही. – डा. शशीकांत पवार, वैद्यकीय अधिकारी