पुणे की तर्ज पर औरंगाबाद जिले को भी कोविड निधि उपलब्ध कराए सरकार

  • सांसद जलील की सीएम ठाकरे से मांग

औरंगाबाद. कोरोना महामारी पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने पुणे को राज्य आपत्ति प्रतिसाद  निधि से 151 करोड़  रुपए की निधि उपलब्ध कराई  है. उसी तर्ज पर औरंगाबाद जिले में इस महामारी के खात्मे के लिए निधि उपलब्ध कराने  की मांग औरंगाबाद के सांसद इम्तियाज जलील ने राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से की है.

मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

इस संबंध में सांसद जलील ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को एक पत्र लिखा है. पत्र में सांसद ने बताया कि औरंगाबाद जिले के कोविड मरीजों को इलाज के लिए कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. ग्रामीण परिसर के अस्पतालों में इमारतें खडी हैं, परंतु उसमें यंत्र सामग्री और मनुष्य बल का अभाव है. सांसद जलील ने बताया कि जिला प्रशासन महामारी पर लगाम लगाने के लिए अपने स्तर पर विविध उपायों पर अमलीजामा पहना रहा है. निधि की कमी के चलते जिले के कई सरकारी अस्पताल मरीजों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा देने के अलावा जिला प्रशासन  अन्य उपायों पर अमलीजामा पहनाने में असमर्थ साबित हो रहा है.

 कई समस्याएं उत्पन्न हो रही 

निधि के अभाव में जिला प्रशासन के समक्ष कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए आ रहीं समस्याओं से सांसद जलील ने अवगत कराते हुए बताया कि ग्रामीण परिसर में कोविड-19 संक्रमित मरीजों का इलाज के लिए आरटी-पीसीआर किट्स, लैब किट्स, कोविड मेडिसीन, एंटिजन रेमेडेसीविर इंजेक्शन, एन-95 मास्क की कमी, सरकारी और निजी कोविड सेंटर में मरीजों के लिए बेड की कमी, गंभीर मरीजों के लिए ऑक्सीजन बेड की कमी, वेटिंलेटर है, लेकिन उसे कार्यान्वित करने के लिए संबंधित डॉक्टरों की कमी, मरीजों को सेवा देनेवाले  विशेषज्ञ डॉक्टर्स और वैद्यकीय कर्मचारियों का बकाया वेतन, अखंड सेवा देते हुए अंतर वासित डॉक्टरों का प्रलंबित मानधन ऐसी कई समस्याएं हैं, जिसके चलते जिला प्रशासन को कोरोना महामारी पर रोक लगाने के लिए कई दिक्कतें आ रही हैं. जिस तरह राज्य सरकार ने  पुणे को 151 करोड़, कोल्हापुर को 25 करोड़, सातारा को 45 करोड़, सांगली को 17 करोड़, सोलापुर को 35 करोड़ से अधिक का निधि मंजूर किया, उसी तरह औरंगाबाद को 151 करोड़ रुपए का निधि उपलब्ध कराने की मांग सांसद इम्तियाज जलील ने राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को भेजे पत्र में की है.