अखबार व पत्रकारों पर दर्ज हुए मामले वापस ले सरकार

– विभागीय आयुक्त द्वारा  सीएम ठाकरे को श्रमिक पत्रकार संघ का ज्ञापन

औरंगाबाद. शहर में कोरोना के बढ़ते कहर पर प्रशासन की खामियों को उजागर करने का सिलसिला औरंगाबाद के एक प्रमुख मराठी अखबार ने बीते एक पखवाड़े से जारी रखा था. इससे बौखलाए पुलिस व राजस्व प्रशासन ने अखबार के प्रकाशक, संपादक उसके 7 पत्रकारों पर मामले दर्ज किए. अखबार पर दर्ज मामलों पर औरंगाबाद श्रमिक पत्रकार संघ के पदाधिकारियों ने सोमवार को विभागीय आयुक्त सुनील केन्द्रेकर से मुलाकात कर कडी निंदा कर सीएम उध्दव ठाकरे के नाम एक ज्ञापन सौंपा.

दबाव नीति पर कड़ा ऐतराज जताया

श्रमिक पत्रकार संघ के सचिव विकास राउत, वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद माने, डॉ.अब्दुल कदीर के नेतृत्व में मीडिया कर्मियों ने विभागीय आयुक्त केन्द्रेकर से मुलाकात कर प्रशासन द्वारा अखबार व पत्रकारों पर मामले दर्ज कर अपनायी गई दबाव नीति पर कड़ा ऐतराज जताया. पत्रकारों ने बताया कि शहर में कोरोना के बढ़ते कहर के लिए एक मराठी अखबार व उसके पत्रकारों ने कमियों को उजागर कर प्रशासन को आगाह किया, लेकिन प्रशासन ने मराठी अखबार व उसके पत्रकारों पर मामले दर्ज कर पत्रकारिता के आजादी में अंकुश लगाने का प्रयास किया.

सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

औरंगाबाद श्रमिक पत्रकार संघ ने सीएम उध्दव ठाकरे के नाम सौंपे ज्ञापन में बताया कि कोराना महामारी के बीच सरकार, पुलिस यंत्रणा, स्वास्थ्य यंत्रणाओं का अपने स्तर पर बड़ा संघर्ष जारी है. इस लडाई में जनजागृति, कोरोना की लडाई, सकारात्मक घटना, नागरिकों को मदद करनेवाले व्यक्ति तथा संस्था को प्रसिध्दी ऐसे कई सकारात्मक समाचारों के माधार पर मीडिया अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. महामारी को लेकर प्रशासन द्वारा किए जा रहे कार्यों में कई खामियां भी सामने आ रही है. उन्हें उजागर करने का काम भी मीडिया कर रहा है. राज्य के कई शहरों में कोरोना नियंत्रण में आ चुका है, लेकिन औरंगाबाद में हर दिन डेढ़ सौ से दो सौ मरीज पाए जाना यह नकारात्मक विक्रम कर रहा है. ऐसे परिस्थिति में आला अधिकारियों की क्या गलतियां  हो रही है, कोरोना नियंत्रण में क्यों नहीं आ पा रहा है. इसको लेकर मीडिया अपनी भूमिका निभाकर खबरें प्रकाशित कर रहा है.यहीं काम मराठी अखबार कर रहा है. ऐसे में प्रशासन ने उस अखबार के प्रकाशक, संपादक तथा पत्रकारों पर मामले दर्ज कर मीडिया की आवाज दबाने का काम प्रशासन ने शुरु किया है. जिसका पत्रकार संघ विरोध करता है.

अखबार की खबरों पर हाईकोर्ट ने लिया संज्ञान

औरंगाबाद श्रमिक पत्रकार संघ ने ज्ञापन में सीएम ठाकरे को बताया कि कोरोना महामारी पर अखबारों में छपी खबरों पर ही औरंगाबाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेकर खुद से याचिका दायर की. पत्रकारों को अपने कर्तव्य से डराने के लिए पुलिस विभाग के माध्यम से डराना यह  पुलिस यंत्रणा का अपने स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करने का निदंनीय प्रकार है. सच्चाई को उजागर करने का काम मराठी अखबार ने किया. इसलिए अपराध दर्ज करना यह पत्रकारों की आजादी पर अंकुश लगाने जैसा है.  

 योध्दा के रुप में काम कर रहे हैं मीडियाकर्मी

पत्रकार संघ ने चेताया कि हम प्रशासन के इस दबाव तंत्र से न घबराते हुए जनता के सामने प्रशासन की कमजोरियां लाकर अधिकारियों की पोल खोलते रहेंगे.औरंगाबाद श्रमिक पत्रकार संघ ने अंत में सीएम ठाकरे से कहा कि कोरोना की इस लडाई में मीडियाकर्मी भी अपनी जान की परवाह किए बिना एक योध्दा के रुप में काम कर रहे हैं, लेकिन औरंगाबाद में पुलिस प्रशासन ने अखबार व पत्रकारों पर मामले दर्ज कर मीडिया कर्मियों को प्रताडि़त करने का काम किया है. इसलिए दर्ज मामला वापस लेकर संबधितों को लिखित में दोबारा ऐसी गलती न करने को लेकर आग्रह करें. इस अवसर पर पत्रकार सतीश वैरालकर,  विद्या गावंडे, राहुल डोल्हारे, आशीष चौधरी, विजय साठे, श्रीकांत सराफ, तुषार वखरे, साजिद पठान, हरेन्द्र केंदले, सुनील चन्द्र वाघमारे, रोशनी शिंपी, मोहसिना शेख, राम शिनगारे, राम वायभट, प्रवीण ब्रम्हापुरकर, शफीउल्ला हुसैनी, जफर शेख,  मोहम्मद इरशाद, आरेफ देशमुख,मनोज पराती, योगेश लोंढे, तुषार बोडखे आदि उपस्थित थे.