Imtiaz Jalil

  • सांसद जलील ने किया भंडाफोड़

औरंगाबाद. सिर पर वजन ढोने वाले पंजीकृत माथाड़ी कामगारों के मजदूरी की रकम से हर माह 30 प्रतिशत लेवी की रकम वसूली जाती है। लेवी की रकम से माथाड़ी कामगारों को पीएफ निधि, घर के किराया का भत्ता, होम लोन, बीमारी तथा त्यौहारों पर छुट्टियां की रकम, दीपावली बोनस आदि सुविधाएं देने का कानून बना हुआ है। लेवी की रकम से तय पीएफ की रकम पीएफ कार्यालय में जमा न करने के अलावा कामगारों को दी जाने वाली विविध सुविधाओं का लाभ न उन्हें न पहुंचाते हुए औरंगाबाद जिले के माथाड़ी बोर्ड के पदाधिकारियों ने लेबर आयुक्त तथा पीएफ कार्यालय के अधिकारियों से मिलीभगत कर करीब 50 करोड़ का घोटाला किया है। यह आरोप जिले के सांसद इम्तियाज जलील ने यहां लगाते  हुए इस घोटाले का  विस्तृत भंडाफोड़ आयोजित प्रेस वार्ता में किया। 

उन्होंने बताया कि 5 जून 1969 को माथाड़ी कामगार कानून अस्तित्व में आया।  उस कानून पर अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य के 6 विभागों में 36 माथाड़ी बोर्ड स्थापित किए गए। वर्तमान में औरंगाबाद माथाड़ी बोर्ड में 7 हजार माथाड़ी कामगार पंजीकृत है। शहर में ट्रकों तथा रेलवे से आने वाला माल चढ़ाना और उतारना, माल की थप्पी लगाना आदि विविध बोझ उठाने के काम माथाड़ी कामगार सालों से करते हैं। इसके ऐवज में माथाड़ी कामगारों को मिलने वाली मजदूरी से लेवी की 30  प्रतिशत रकम उनके मालिक माथाड़ी बोर्ड में पिछले 10 सालों से जमा कर रहे हैं। 

लेवी की रकम से आज तक नहीं मिले माथाड़ी कामगारों को फायदे 

सांसद जलील ने बताया कि 1 मई 2010 से लेवी की 30 प्रतिशत रकम में से 12 प्रतिशत रकम  पीएफ के लिए, 8.33 प्रतिशत रकम दीपावली बोनस, वेतन वाली छुट्टियों के लिए 0.67, ग्रज्युइटी के लिए 2 प्रतिशत, इन्शुरेन्स के लिए 1 प्रतिशत, माथाड़ी बोर्ड के खर्च के लिए 6 प्रतिशत आरक्षित है। इस रकम से कई सुविधाओं का लाभ माथाड़ी कामगारों को मिलना चाहिए। परंतु, बीते 10 सालों से लेवी की जमा रकम माथाड़ी बोर्ड के पदाधिकारियों ने अपने निजी खाते में टर्न कर करीब  50 करोड़ रुपए का घोटाला करने का आरोप सांसद जलील ने लगाया।

पीएफ कार्यालय में जमा नहीं की गई रकम 

उन्होंने बताया कि माथाड़ी कामगारों से  वसूली गई पीएफ निधि की रकम भी पीएफ कार्यालय में जमा नहीं की गई। इस बारे में मैंने जब  पीएफ कार्यालय से पत्रव्यवहार किया तब पीएफ कार्यालय के अधिकारियों ने मुझे उसका जवाब देना मुनासिब नहीं समझा। माथाड़ी बोर्ड ने कामगारों की जमा लेवी की रकम  अलग-अलग खाते खोलकर जमा की। इस रकम पर आज तक लाखों रुपए का ब्याज मिला।वह रकम कहां खर्च की गई इसका कोई लेखा जोखा माथाड़ी बोर्ड के पास नहीं है। पीएफ के रकम से कामगारों को पेंशन, ईएसआईसी, कर्ज का लाभ आज तक नहीं मिला।फिर यह पैसा कहां गया? इस पर भी सांसद जलील ने सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि मैं जब इस गबन के गहराई में गया तब मुझे जानकारी मिली कि माथाड़ी बोर्ड में जमा हुई पीएफ की  रकम अधिकारी मार्केट में ब्याज से देकर उस पर महिनों को हजारों रुपए कमा रहे है।पीएफ निधि से बोर्ड व  पीएफ कार्यालय के अधिकारियों ने करोडो रुपए का घोटोला किया है। पीएफ की जमा रकम के बारे में पीएफ कार्यालय से जानकारी मांगने पर वहां के अधिकारी वह जानकारी देने से कन्नी काटते हुए चुप्पी साध रहे हैं।

कई फायदों से वंचित हैं माथाड़ी कामगार 

सांसद जलील ने बताया कि पीएफ के अलावा लेवी की जमा रकम से माथाड़ी कामगारों को बोर्ड की ओर से दीपावली के पावन पर्व पर बोनस देना बंधनकारक है। उसके लिए बोर्ड  प्रति माथाड़ी कामगार से 8।33 प्रतिशत जमा करता है। उक्त बोनस  की रकम माथाड़ी कामगारों को आज तक समय पर नहीं दी गई। उससे कितनी रकम जमा होती, उसका कोई लेखा जोखा माथाड़ी बोर्ड के पास नहीं है। इसके अलावा पूरा  वेतन वाली छुट्टी जैसे कि  1 मई, 26 जनवरी व 15 अगस्त के ऐवज में पंजीकृत कामगारों से 0.67 प्रतिशत रकम वसूली जाती। आज तक एक भी कामगार को सरकारी छुट्टी के दिन वेतन वाली छुटटी नहीं दी गई। उलटा इन छुट्टियों के दिन कामगारों से काम कराकर लिया जाता। फिर कामगारों से आज तक  वसूली गई 0.67 प्रतिशत रकम कहां गई? इस पर भी सांसद जलील ने सवाल उठाया। उधर, सभी माथाड़ी कामगारों का इन्शुरन्स करना बोर्ड को बंधनकारक है। इन्शुरेन्स के नाम पर कामगारों से रकम वसूली जाती। परंतु, उनका इन्शुरेन्स नहीं किया जाता।

पुलिस आयुक्त व एसीबी से करेंगे शिकायत 

सांसद इम्तियाज जलील ने बताया कि माथाड़ी कामगारों से लेवी के रुप में गत 10 सालों में वसूली गई करोड़ों रकम में हुए गबन की शिकायत वे जल्द ही शहर के पुलिस आयुक्त डॉ. निखिल गुप्ता व एंटी करप्शन ब्यूरों से करेंगे। इन दोनों  विभागों ने इस गबन की जांच की तो बोर्ड के कई पदाधिकारी जेल में जाएंगे। जलील ने चेताते हुए कहा कि शहर पुलिस व एसीबी ने इस बबन की जांच नहीं की तो वे  न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे। अंत में जलील ने बताया कि बोर्ड के पदाधिकारियों द्वारा किए करोड़ो के गबन के मामले को उजागर न करने के लिए मुझ पर बड़े पैमाने पर दबाव लाया गया। पर मैंने उस दबाव से  न घबराते हुए इसका भंडाफोड़ किया है।