अपनी लापरवाही से प्रवासी मजदूर आए ट्रेन की चपेट में

– करमाड हादसे की प्राथमिक रिपोर्ट जारी

औरंगाबाद. बीते 8 मई के तड़के औरंगाबाद से सटे करमाड़ रेलवे स्थानक के निकट पटरी पर सो रहे मध्य प्रदेश के 18 प्रवासी मजदूरों की मालगाड़ी की चपेट में आकर मौत होने का दर्दनाथ हादसा हुआ था. इस घटना की तत्काल जांच कराने के आदेश रेल मंत्रालय ने दिए  थे. दक्षिण मध्य  रेलवे के अधिकारी राम कृणाल द्वारा  की गई प्राथमिक जांच की रिपोर्ट सामने आयी है. प्राथमिक जांच में अपनी लापरवाही से 16 प्रवासी मजदूर मालगाडी की चपेट में आकर अपनी जान गंवाने की जानकारी सामने आयी है.

16 मजदूरों की हुई थी मौत

ध्यान रहे कि 7 मई की रात जालना से औरंगाबाद की ओर से पैदल निकले  19 मजदूर तडके करमाड रेलवे स्थानक के निकट पटरी पर पहुंचे थे. काफी थके होने से 16 मजदूर रेलवे की सेवा बंद होने की गलत फहमी में पटरी पर सो गए. जबकि उस समय रेलवे की मालवाहक रेल सेवा जारी थी. इसी दरमियान तडके सवा पांच बजे औरंगाबाद से जालना की ओर जा रही मालगाड़ी ने इन मजदूरों को अपने चपेट में लिया था. इस हादसे में 16 प्रवासी मजदूरों की दर्दनाक मौत हुई थी.

पैदल नहीं चलते तो जान बच जाती

रेलवे अधिकारी राम कृणाल ने उच्चस्तरीय जांच कर तैयारी की गई प्राथमिक रिपोर्ट में यह बात सामने आए कि  जिस दिन दुर्घटना घटी उस दिन देश में कर्फ्यू तथा धारा 144 लागू थी. जिसके चलते रेल पटरी तथा परिसर में 5 से अधिक लोगों को एक साथ जमा होना कानून से मनायी थी. प्रवासी मजदूरों का रेल पटरी से निकलकर पैदल अपने मंजिल तक पहुंचना अवैध था. ऐसे स्थिति में रेलवे विभाग का कोई भी अधिकारी एवं कर्मचारी दुर्घटना को टाल नहीं सकता था. मजदूर अगर नियमों का पालन करते  और किसी भी परमिशन के बिना जालना के कंपनी से अपने गांव पैदल जाने का निर्णय नहीं लिया होता तो यह दुर्घटना टल जाती.