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    औरंगाबाद. स्थानीय एमआईएम सांसद इम्तियाज जलील (MP Imtiaz Jaleel) द्वारा कोरोना महामारी के दौरान राज्य के स्वास्थ्य विभाग (Health Department) में रिक्त पदों (Vacancies) को तत्काल भरने की मांग को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय के औरंगाबाद खंडपीठ में दायर की गई जनहित याचिका पर शुक्रवार को मुख्य न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता तथा न्यायमूर्ति रवीन्द्र घुगे के खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। सुनवाई के दरमियान राज्य सरकार की ओर से डॉ. साधना तायडे, संचालक स्वास्थ्य सेवा मुंबई ने रिक्त पदों को लेकर अतिरिक्त शपथपत्र दाखिल किया। इस संदर्भ में राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने  न्यायालय के सामने राज्य सरकार का पक्ष रखा।

    गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों को तत्काल भरने की मांग कर सांसद जलील उनके द्वारा हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दरमियान खुद न्यायालय में हाजिर रहकर पैरवी कर रहे है। जनहित याचिका पर चालू सप्ताह में तीसरी बार सुनवाई हुई। आज हुई सुनवाई के दरमियान महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने न्यायालय को अगली सुनवाई के समय औरंगाबाद सहित पूर्ण महाराष्ट्र के लिए स्वास्थ्य विभाग में रिक्त पदों और उसके संदर्भ के भरती प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी सहित प्रतिज्ञा पत्र पेश करने का उल्लेख किया। 

     महाधिवक्ता ने समय मांगा

    न्यायालय ने महाधिवक्ता को कोरोना प्रकोप के चलते राज्य में गंभीर परिस्थिति होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया पूरी करने में इतनी देरी क्यों? यह सवाल किया। इस पर महाधिवक्ता ने भरती प्रक्रिया के बारे में विस्तृत कालबध्द कार्यक्रम सुधारित प्रतिज्ञा पत्र द्वारा अगली सुनवाई 29 जून के पूर्व पेश करने के लिए समय मांगा। 

    सिविल सर्जन के 296 पद रिक्त 

    सुनवाई के दौरान पैरवी करते हुए सांसद जलील ने  न्यायालय को बताया कि राज्य में सिविल सर्जन संवर्ग की कुल 683 पद है, उसमें 296 पद रिक्त है। साथ ही जिला स्वास्थ्य अधिकारी संवर्क के 297 पदों में से 205 पद, स्पेशालिटी संवर्ग के 565 पदों में से 400 पद, जीआरडी संवर्ग के 10 हजार 323 पदों में से 3 हजार 767 पद रिक्त है। बीते सवा साल से कोरोना का कहर जारी है। ऐसे में सरकार ने जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए किसी प्रकार की देरी न करते हुए तत्काल भरती प्रक्रिया पूरी करने पर सांसद जलील ने पैरवी करते हुए बल दिया। सारी स्थिति को जानने के बाद हाईकोर्ट ने विस्तृत मुद्दों के साथ स्पष्टीकरण देनेवाला कालबध्द कार्यक्रम सहित सुधारित प्रतिज्ञा पत्र दाखिल करने के आदेश महाधिवक्ता को दिए। बता दें कि इससे पूर्व 16 जून को हुई सुनवाई के दरमियान सांसद जलील ने सरकारी घाटी अस्पताल के सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल में रहनेवाली त्रुटियां, धुल खा रही यंत्र सामग्री तथा कॉडिओ वैस्क्युलर थोरॅसिक सर्जन डॉ. आशीष भावापुरकर की अप्रैल 2018 को हुई नियुक्ति से लेकर आज तक अनुपस्थिति को लेकर हाईकोर्ट को आगाह किया था।