सन्त की बन्द मुट्ठी लाख की, खुल जाए तो करोड़ की

औंरगाबाद. गुरुदेव एवम् पीयूष सागर गुरदेव का 2020 का चातुर्मास ऐतिहासिक नगरी मुरादनगर हो रहा है. श्री 1008 मुलनायक आदिनाथ स्वामी  भगवान के दिव्य चरणों में नवरात्रि महोत्सव में सागर महाराज ने कहा कि सन्त की बन्द मुट्ठी लाख की ,खुल जाए तो करोड़ की. सन्त बन्द दृष्टि और बन्द मुट्ठी का ध्यान करता है.

वह अपने भीतर के पावर को ऊर्जावान बना रहा है. ध्यान के बाद जब आंख और हाथ खोलता है तो  अपनी दृष्टि जिस भक्त पर गड़ा कर उसके शीष पर हाथ रख दे तो उस भक्त के जीवन में परिवर्तन आ जाता है.

बोल कर आशीर्वाद ना लें

सागर महाराज ने कहा कि कभी किसी सन्त से बोल कर या मांग कर आशीर्वाद नहीं लेना. आशीर्वाद स्वयं ही मिलता है. बस तुम तो नमन और प्रणाम करते जाना. तुम्हारा नमन जिस दिन हृदय से होगा, उस दिन संत का आशीर्वाद तुम पर बरबस बरस जाएगा. आशीर्वाद तो वही है, जो ह्रदय से फूटे. जिस दिन संत की कृपा दृष्टि, आशीर्वाद तुम्हें मिल जाए समझना तुम्हारा कल्याण हो गया. तुम्हें सब कुछ मिल गया, लेकिन यह घटना अचानक होगी और जब भी घटेगी, तब ना तो इसकी भनक संत को पड़ेगी और ना ही भक्त को. ना तो संत को मालूम होगा कि उन्होंने भक्तों को आशीर्वाद दे दिया और ना ही भक्तों को पता होगा कि उन्हें आशीर्वाद मिल चुका है.बड़ी रहस्यमयी घटना है. जो हमेशा दो हृदय के बीच घटती है.फिर भी दोनों ह्रदय अनजान बने रहते हैं. आशीर्वाद तो वही है. जो सन्त के हृदय से सहज झरने की तरह फूटे और चारों ओर से तुम पर बरस जाए. सहज हाथ आपके शीश पर रख जाए फिर देखो जीने का आनंद.