प्रतियोगिताओं में मेडल हम जितते हैं, फिर महाराष्ट्र में जिम्नास्टिक केन्द्र क्यों नहीं?

– साई के एनसीओई योजना को लेकर महाराष्ट्र जिम्नॉस्टिक संगठन का सवाल

औरंगाबाद. जिम्नास्टिक्स के सभी प्रकार में औरंगाबाद तथा विकल्प से महाराष्ट्र के खिलाडिय़ों ने मेडल तालिका के अव्वल तीन में अपना दबदबा कायम रखा है. इसके बावजूद महाराष्ट्र को नेशनल सेंटर फॉर एक्सलेन्स यानी एनसीओई के महाराष्ट्र केन्द्र से जिम्नास्टिक निवार्सन क्यों किया गया? यह सवाल महाराष्ट्र राज्य जिम्नास्टिक संगठन के सचिव मकरंद जोशी ने यहां किया.

गत कई सालों से देश भर में हुए राष्ट्रीय स्कूली स्पर्धा, नेशनल गेम्स, खेलो इंडिय़ा जैसी सभी प्रतियोगिताओं में औरंगाबाद तथा महाराष्ट्र के खिलाडिय़ों ने अपना दबदबा निर्माण किया है. मेडल तालिका में अव्वल तीन में रहनेवाले महाराष्ट्र में जिम्नॉस्टिक खेल ने गहरी जड़े जमायी है. उसके परिणाम भी अब दिखाई देने लगे है. 

औरंगाबाद केन्द्र में 300 खिलाडी प्रैक्टिस करते हैं  

औरंगाबाद केन्द्र में वर्तमान में 300 खिलाडी प्रैक्टिस करते हैं. शहर में यह आंकड़ा दो हजार के करीब है. गत तीन सालों में 100 से अधिक खिलाडिय़ों ने राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कई मेडल जीते है. औरंगाबाद के खिलाडिय़ों के प्रदर्शन का  ग्राफ दिन ब दिन बढऩे के बावजूद शहर का जिम्नॉस्टिक्स  केन्द्र बंद करना यहां के जिम्नॉस्टिक खिलाडिय़ों पर अन्याय है. बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद यह केन्द्र क्यों बंद किया जा रहा है? इस सवाल का जवाब आज तक राज्य जिम्नॉस्टिक संगठन को केन्द्रीय खेल मंत्रालय से नहीं मिला है. 

खेल मंत्रालय ने नहीं दिया पत्र का जवाब

संगठन द्वारा केन्द्र बंद करने के लिए गए निर्णय पर केन्द्रीय खेल मंत्री किरण रिजिजू तथा स्पोर्टस एथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी साई के दिल्ली के अधिकारियों से पत्र व्यवहार किया गया, परंतु आज तक खेल मंत्रालय ने हमारे पत्र व्यवहार का जवाब नहीं दिया है. इस पर संगठन के सचिव मकरंद जोशी ने नाराजगी जतायी.

 पूरे पश्चिम विभाग में नहीं रहेंगा केन्द्र

औरंगाबाद का जिम्नॉस्टिक केन्द्र यह पश्चिम विभाग का स्पोर्ट्स एथॉरिटी का एकमात्र जिम्नॉस्टिक प्रशिक्षण केन्द्र है. यह केन्द्र को बंद करने की प्रक्रिया जारी है. यह केन्द्र बंद होने पर पूरे पश्चिम विभाग में साई का एक भी जिम्नॉस्टिक प्रशिक्षण केन्द्र नहीं रहेंगा. जिम्नॉस्टिक यहां की मिट्टी में गहरी जड़े मजबूत किया हुआ खेल है. मेडल तथा खिलाडिय़ों की संख्या तथा उपलब्ध सुविधा को देखेकर वर्तमान में औरंगाबाद का साई  केन्द्र शुरु रहें. साथ ही नेशनल सेंटर ऑफ एक्सलन्स भी औरंगाबाद में जिम्नॉस्टिक दिया जाए. यह हमारी मांग होने की जानकारी एशियाई जिम्नॉस्टिक्स  यूनियन के तांत्रिक समिति के सदस्य मकरंद जोशी ने दी.

 रिजल्ट के आधार पर खेल हो शामिल : उपसंचालक

औरंगाबाद के साई में एनसीओई में अब 6 खेल है. इसमें एथॅलेटिक्स, तिरंदाजी, तलवाबर बाजी, हॉकी, बॉक्सिंग तथा वेटलिफ्टिंग शामिल है. इस केन्द्र से अब हैंडबॉल, जिम्नॉस्टिक, तायक्वांदों, जुडो, फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी जैसे खेलों को बंद कर दिया गया है. हमने हमारे वरिष्ठों से विनंती की हैं कि अब तक की सफलता, गुणवत्ता  वाले सुविधा इस पर आधारित एक दो खेल को शामिल करें. यह जानकारी उपसंचालक वीरेन्द्र भांडारकर ने दी.