जिले के लिए  5, 42, 804 किताबें, हर बच्चे के हाथ में होंगी पुस्तकें

    भंडारा. समग्र शिक्षा के अंतर्गत नि:शुल्क पाठ्य किताबों का वर्ष 2021- 2022 के लिए मांग एवं आपूर्ति के संबंध में महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षक परिषद मुंबई के राज्य प्रकल्प संचालक द्वारा 7 मई एवं 21 मई को खत भेजे गए जिसमें राज्य के सभी जिला परिषद शिक्षा विभागों को पाठ्य किताबों की मांग के बारे में सूचित किया गया. जहां तक भंडारा जिले की बात है कक्षा 1ली से लेकर 8वीं के बच्चों के लिए 5,42,804 किताबें की मांग दर्ज की गयी हैं. यह किताबें शीघ्र ही बच्चों के हाथों में होगी. मंगाई गयी 5,42,804 किताबें यह पुरानी शेष किताबों के अलावा होंगी. जिन्हें फिर से इस्तेमाल किया जा सकता है. 

    सभी सरकारी स्कूलें, स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं द्वारा संचालित स्कूल एवं सरकार द्वारा अनुदानित शालाओं में पढ़ रहे हैं लड़के-लड़कियों के लिए तथा यू-डायस प्लस वर्ष 2019-20 के विद्यार्थी संख्या के अनुसार एवं पिछले वर्ष 2019 एवं 2020-21 वर्ष में शेष किताबें एवं ऐसी किताबें जिनका इस्तेमाल हो सकता है, इन किताबों को आवश्यक मांग में से हटाने के पश्चात की आवश्यक किताबों की संख्या के बारे में बाल भारती, पोर्टल पर आनलाइन डिमांड को मार्च 2021 अंत तक दर्ज करनी थी.  

    भंडारा जिला शिक्षा विभाग द्वारा सभी तहसीलों में आवश्यक पाठ्य किताबों की आवश्यक्ता का जायजा लिया एवं मांग दर्ज की. इसके पश्चात राज्य पर राज्य प्रकल्प संचालक महाराष्ट्र प्राथमिक शिक्षण परिषद मुंबई को सूचित किया गया कि भंडारा जिले के लिए कितनी किताबों लगेंगी. लंबी प्रक्रिया के पश्चात भंडारा जिले के लिए कुल 5,42,804 किताबें मंजूर की गई है. इन्हें 92,135 विद्यार्थियों में बांटा जाएगा. यह सभी विद्यार्थी कक्षा 1ली से लेकर कक्षा 8 वीं में पढ़ रहे हैं. 

    प्राप्त जानकारी के अनुसार भंडारा जिले में लाभार्थी संख्या 18,601 है. जिन्हें 1,10,554 किताबें भेजी जा रही हैं. लाखांदूर तहसील में 11,107 विद्यार्थियों को 64,765 किताबें बांटी जाएंगी. लाखनी तहसील में 10,618 विद्यार्थियों को 62,990 किताबें भेजी जा रही हैं. मोहाड़ी तहसील में 11,074 विद्यार्थियों को 65,301 किताबें भेजी जा रही है. पवनी तहसील में 13,270 विद्यार्थियों को 77,229 किताबें भेजी जा रही हैं. साकोली तहसील में 10,921 विद्यार्थियों को 64,599 किताबें एवं तुमसर तहसील में 16,537 विद्यार्थियों को 97,366 किताबें भेजी जा रही हैं. भंडारा जिले में कक्षा पहली से आठवीं में पढ़ रहे विद्यार्थियों की कुल संख्या 15 है इन्हें 5,42,804 किताबें भेजी जा रही हैं.

    1,12,827 किलो होगा वजन

    एक रोचक जानकारी है कि भंडारा जिले में मंगाई गई 5,42,804 किताबों का कुल वजन 1,12,826.825 किलोग्राम है.

    हर बच्चे को मिलेंगी किताबें

    सूत्रों ने बताया कि पाठ्यकिताबों की मांग की गई है. वह पिछले वर्ष की शेष बची पाठ्य पुस्तकों एवं ऐसी किताबें जिनका फिर से इस्तेमाल हो सकता है. उनकी कुल संख्या घटाने के पश्चात मंजूर किया गया है. किताबें कम न पड़े इस दृष्टि से नई पाठ्य किताबें एवं शेष बची एवं सेवायोजन वितरण करने का निर्देश दिया गया है. 

    सीधे केंद्र स्तर पर पहुंचेंगी किताबें

    सूत्रों ने बताया कि वर्ष 2021-22 के शैक्षिक सत्र में पाठ्य किताबें यह बालभारती गोडाउन से सीधे केंद्र शाला तक भेजी जाएंगी. इसे बाल भारती नागपुर से केंद्रीय पाठ्य किताबें की आपूर्ति करने के लिए केंद्र निहाय, माध्यमनिहाय, कक्षावार एवं विषयवार पाठ्य किताबों का वितरण नियोजन तैयार करने को कहा गया है. 

    जिम्मेदारी शिरीष कार्गो सर्विसेज पर

    चूंकि पूरे राज्य में लाखों की संख्या में पाठ्य पुस्तकों को बच्चों तक तय समय पर पहुंचाना है. इसके लिए राज्य सरकार के प्राथमिक शिक्षा महासंचानालय द्वारा पूरी तैयारी की गई है.  समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत नि:शुल्क पाठ्य किताबें एवं स्वाध्याय पुस्तिकाओं को बालभारती गोदाम से तहसील स्तर तक एवं बाद में तहसील स्तर से केंद्र स्तर पर पहुंचाने की जिम्मेदारी शिरीष कार्गो सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड मुंबई को दी गई है. 

    ढुलाई पर 3.94 करोड़ रु. होंगे खर्च

    सूत्रों ने बताया कि किताबों को केंद्र स्तर तक पहुंचाने के लिए 1 जून 2021 को उक्त संस्था के साथ में एक करार भी किया गया है. इसमें यह भी बताया गया है कि शिरीष कार्गो को किस तरह बाल भारती के गोदाम से किताबें उल्लेख कर तहसील स्तर एवं केंद्र स्तर तक किताबों को पहुंचाना अनिवार्य होगा. किताबें पहुंचाने के लिए एक निश्चित समय दिया गया है. जिसके भीतर ही पाठ्य किताबें एवं स्वाध्याय पुस्तिकाओं को पहुंचाना होगा. इसके लिए ढुलाई दर निश्चित की गई है.

    जिसमें बाल भारती के गोदाम से लेकर तहसील स्तर तक किताबों को पहुंचाने के लिए प्रतीक मीट्रिक टन प्रति किलोमीटर की दर 11.75 रु. होगी. इसमें लोडिंग अनलोडिंग एवं सभी खर्च, टैक्स व शुल्क आदि शामिल होंगे. इसके पश्चात तहसील स्तर तक किताबें पहुंचाने के लिए संस्था को 1.20 रु. की दर से भुगतान किया जाएगा. पूरे राज्य में किताबों के विद्यार्थियों तक पहुंचाने पर होने वाले खर्च का अनुमान 394 लाख रुपए लगाया गया है. 

    हर हाथ में होंगी किताबें

    कोरोना की वजह से कई मुश्किलें है. किताबों को बच्चों के घर तक पहुंचाने या फिर स्कूल में बच्चे या उनके अभिभावकों को बुलाकर बांटने का नियोजन करना होगा. किताब वितरण कार्य बेहद मुश्किल है.इसके बावजूद शिक्षा विभाग इसे पूरी संजीदगी के साथ कर रहा है.