Rising prices of petrol and diesel have broke the common man, watch video

    पालांदूर. भारत एक कृषि प्रधान देश है. कृषि ही एक ऐसा व्यवसाय है, जो लाखों लोगों को रोजगार दे सकता है. लेकिन डीजल के दाम बढ़ने से खेती कार्य का खर्चा बढ़ गया है. ज्यादातर किसान बुआई और जुताई के लिए तकनीकी ज्ञान के सहारे खेती करते हैं. डीजल के दामों में वृद्धि होने के कारण ट्रैक्टर मालिकों ने ट्रैक्टर का किराया बढ़ाया है. डीजल के दामों में भारी प्रमाण में वृद्धि होने के कारण युवा वर्ग खेती करने के लिए आगे आने के बजाय पीछे जा रहा है. 

    युवाओं को रोजगार मिलना हुआ कठिन

    कोरोना जैसे वैश्विक महामारी के कारण देश वित्तीय संकट का सामना कर रहा है. निजी कंपनी में हो या सरकारी नौकरियां मिलना ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को कठिन होता जा रहा है, ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के युवा पारंपरिक खेती को नए तरीके से करने के लिए आगे आ रहे हैं. 

    उपज को लागत के हिसाब से नहीं मिल रहे दाम

    कोरोना की वजह से शहरों में काम करने वाले युवा भी गांव में बेरोजगार बैठे हैं. वह आधुनिक तकनीक द्वारा खेती करना चाहते हैं लेकिन खेती करने के लिए दिन-ब-दिन लागत बढ़ती जा रही है और उत्पाद को लागत के हिसाब से दाम नहीं मिल रहे. उसी में डीजल की कीमतें बढ़ने के कारण युवा खेती करने के लिए आगे आने से हिचकिचा रहे हैं. कोरोना के कारण मुसीबतों को झेलकर आर्थिक संकट में फंसे किसान पर डीजल के बढ़े हुए दाम ने दोहरी चोट ने उनकी चिंता बढ़ाई है.

    डीजल के दाम हर दिन बढ़ने के कारण लागत पर खर्च बढ़ता जा रहा है. उसी में उत्पादित कृषि माल को अच्छा दाम नहीं मिल रहा, पहले प्रकृति की मार से अधमरे किसान डीजल की दामवृद्धि से कृषि व्यवसाय से मुंह मोड़ रहे हैं. उत्पादन खर्च ज्यादा और उत्पादन के कम दाम इस दोहरे संकट में फंसे किसान पर डीजल की दाम वृद्धि ने बड़ी मुसीबत लाई है.