receipt number, bhandara

  • आननफानन में शुरू किया 01 से नंबरींग

भंडारा. भंडारा नगर परिषद द्वारा जनता कर्फ्यू में बगैर माक्स पहने लोगों को जुर्माने के लिए दी जा रही सेम नंबरींग रसीदों की बात सामने आने के बाद जिले में हडकंप मचा है. सबसे ज्यादा खलबली नप में मची हुई है. रविवार को इसका असर भी देखा गया. लोगों ने चौराहे में खडे नप टीम के पास में जाकर रसीद किताबों को निरिक्षण करने की जीद की. इसी क्रम में शहर के सामाजिक कार्यकर्ता एड. प्रभात मिश्रा की शास्त्रीनगर एवं गांधी चौक में तैनात दस्त के साथ कहासुनी हुई. एड. मिश्रा ने कहा कि नप सीइओ एवं अधिकारियों को जवाब देने के लिए सामने आना चाहिए.

लंबे समय से चल रहा गोखरधंदा
नवभारत ने जुर्माना वसुली के आडे में घोटाले की संभावना पर प्रकाश डालते हुए शनिवार को भंडारा शहर के विभिन्न चौहारों पर लोगों से जुर्माना वसुले जाने के बाद उन्हे दी गयी रसीदों का ब्यौरा इकठ्ठा किया था. जिसमें पता चला कि सभी चौहारों में तैनात नप टीम को सेम नंबरींग रसीद बुक दी गयी थी. जिससे एक ही नंबर की कई रसीदें फाडी गयी थी. जांच में चौकानेवाला तथ्य सामने आया था कि यह गोरखधंदा लंबे समय से जारी है. मई, जुन, जुलाई एवं अगस्त महीने में अलग अलग तारिखों में सेम नंबरीं रसीदें दी गयी थी.

मचा हडकंप : हाथ से डाला बुक नंबर
रविवार को जब सेम नंबरींग मामला प्रकाश में आया. सबसे ज्यादा खलबली नप गलियारे में मची. आननफानन में चौहारों में तैनात नप टीम को दी गयी किताबों में हाथ से पुस्तक नंबर डाला गया. शास्त्रीनगर में तैनात टीम के पास दी गयी रसीद बुक को 1 नंबर दिया गया था. जबकि कुछ स्थानों में दी गयी रसीदों में बुक नंबर नदारद था.

नागरिकों के साथ ठगी : एड. मिश्रा 
सामाजिक मुद्दों को लेकर आक्रमक रहनेवाले एड. प्रभात मिश्रा ने रविवार दोपहर में शहर के चौराहों को दौरा किया एवं सेम नंबरींग के लिए नप अधिकारियों पर भडास निकाली. उन्होने इस नागरिकों के साथ ठगी करार देते हुए कहा कि नप सीओ को इस मामले में जवाब देने के लिए सामने आना चाहिए.

आपदा को भी अवसर बना दिया : सोशल मीडिया पर कसा तंज
सेम नंबरीग रसीद मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोग अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे है. शालब साहु ने तंज कसते हुए कहा कि नप ने “आपदा” को भी “अवसर” बना दिया. भाजपा नेता मो. आबिद सिद्दीकी ने इस मामले में जांच की मांग की है. जबकि जागरूक नागरिक मनीष आठले ने कहा कि जब गणपति के चंदा इकठ्ठा किया जाता है, वहां भी युनीक नंबरींग रसीद दी जाती है. नप को गणपति मंडल से अकाऊंटींग को प्रशिक्षण लेना चाहिए. विश्व हिंदू परिषद पदाधिकारी डा. संजय एकापुरे एवं नितीन मलेवार ने भी नगर प्रशासन द्वारा जांच का आग्रह किया है. नागपुर विद्यापीठ सिनेट सदस्य प्रवीण उदापुरे ने कहा कि इस मामले को ज्वलंत मुद्दा बताया है. प्रणय कुथे एवं प्रमोद साठवने ने आरोप लगाया है कि यह घोटाला ही है. बंटी चन्ने, भरत मल्होत्रा, हिमांशु मोहोकर एवं डा. नितीन तुरसकर ने अपनी कडी प्रतिक्रिया दी है. सचिन वैरागडे नामक पाठक ने अपनी रसीद को साझा करते हुए बताया कि उन्हे मिली रसीद पर भी बुक नंबर नहीं था. शालब साहु ने तंज कसते हुए कहा कि नप ने आपदा को भी अवसर बना दिया. प्रवीण गभने ने मामले की जांच करने एवं नागरिकों से जागरूक होने का आह्वान किया है.

नहीं करते बुक नंबरींग : नप ने माना
रविवार को दोपहर बाद में नप ने सेम नंबरींग रसीद मामले में सफाई जारी की. जिसमें उन्होने माना कि बुक नंबरींग नहीं की गयी थी. लेकिन दावा किया गया कि उनके पास में पायी पायी का हिसाब है. जुर्माना वसुलने के लिए बांटी गयी हर किताब की जानकारी नप में है. जुर्माना वुसली के पश्चात पैसे कैशीयर के पास में दिए जाते है.

फिर भी सवाल बुक नंबर 1 क्यों
रविवार को नप टीम के पास में जो रसीद बुक थी. उसे क्रमांक 1 से शुरू किया था. इससे नप फिर एक बार सवाल के घेरे में आयी है. इक ओर नप सफाई देती है कि उनके पास में जारी हुई सभी रसीद बुक की जानकारी है. ऐसे में रविवार को नप टीम के पास में दी गयी किताब पर वही नंबर होना चाहिए था, जो नप के लेखा विभाग के पास में दर्ज है. क्रमांक 1 से बुक नंबर शुरू करने का मलतब यही है कि नप ने इसके पूर्व तक किसी भी रसीद बुक का नंबरींग किया ही नहीं था.