कब तैयार होगी पर्यटन विकास की रूपरेखा

पवनी. पवनी शहर तथा तहसील क्षेत्र में वृद्धि हो रही है. यहां के पर्यटन स्थलों पर लोगों के आने जाने का सिलसिला भी लगातार जारी है. पवनी शहर तथा तहसील का चेहरा-मोहरा बदलने की क्षमता पर्यटन में है. लेकिन पवनी को पर्यटन क्षेत्र के रूप विकसित करने की दृष्टि से जो रूपरेखा तैयार की जाने थी, वह तैयारी नहीं की गई.

विदर्भ के गोसीखुर्द जलाशय, रूयाल में स्थित महासमाधि स्तूप, प्राचीन किला, अष्ट विनायकों में से एक पंचमुखी गणेश मंदिर, धरणीधर गणेश मंदिर, टेंभेस्वामी मंदिर, वैजेश्वर मंदिर आदि पर्यटन स्थल है. कन्हाला अभ्यारण्य के पवनी वन जीव क्षेत्र आदि भी पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किए जा सकते हैं. पिछले छह वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में बड़ी तेजी से बढ़ा है. यहां के पर्यटन क्षेत्रों में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है. पवनी शहर को पर्यटन शहर के रूप में विकसित करने की बात तो लगातार कही जाती है, लेकिन विकास की दृष्टि से न तो कोई रणनीति बनायी गई है और न ही विकास के बारे में कोई रूपरेखा तय की गई है. विदर्भ की काशी के रूप में ख्यात पवनी शहर विकास से कोसो दूर है, ऐसे में अगर उसे पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करना है तो इसके लिए कारगर रणनीति तथा ठोस कदम उठाना बहुत जरूरी है.