Bird flu crisis deepens in 16 districts

लाखांदूर. राज्य में बर्ड फ्लू के प्रकोप के साथ नियमित मांसाहारी लोगों ने डर से चिकन बाजार की ओर पीठ दिखायी है. जिससे चिकन की बिक्री में भारी गिरावट आई है. एक हफ्ते पहले जब बाजार में चिकन के शौकीनों की भीड़ थी तब यह बताया गया कि कीमत 200 रुपये से 300 रुपये प्रति किलोग्राम थी. किंतु पिछले कुछ दिनों में राज्य में बर्ड फ्लू के प्रकोप से मुर्गी व्यापारी के साथ-साथ मुर्गी व्यापारी भी चिंतित हैं.

तहसील के अधिकांश किसानों ने कृषि के पूरक व्यवसाय के रूप में मुर्गी पालन शुरू किया है. यह आशा की जाती है कि इस केंद्र पर हजारों मुर्गियां और चूजे पाले और बेचे जाएगे. हालांकि ऐन बिक्री के दौरान बर्ड फ्लू के प्रकोप के कारण तहसील के सभी पोल्ट्री फार्म बंद होने के संकेत दे रहे हैं. चिकन व्यापारियों को भी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है.

इस बीच पिछले साल कोरोना स्थिति में, तहसील में कई पोल्ट्री किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ था, किंतु अब बर्ड फ्लू के खतरे के कारण मांसाहारी चिकन बाजार से मुंह मोड़ रहे हैं. हालांकि आशंका है कि अगले कुछ दिनों में कारोबार बंद हो जाएगा, बावजूद कि बाजार में चिकन की कीमत आधे से भी कम हो गई है.

पोल्ट्री व्यापारी चिंतित

पोल्ट्री व्यवसाय बर्ड फ्लू जैसी बीमारी की आशंका से चिंतित हैं. भुखमरी का सामना कर रहे हैं. खेती का व्यवसाय मुख्य रूप से जिले में किया जा रहा है. खेती से दिन-प्रतिदिन धन की हानि हो रही है. जिसके कारण कई पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं ने कृषि पूरक व्यवसाय के रूप में पोल्ट्री व्यवसाय शुरू किया है. इसमें बायलर, खड़कनाथ, कल्याणी, गावरानी, काकरेल विभिन्न नस्लों के मुर्गों के साथ-साथ उनके चूजों को पालकर कुछ पैसे कमाने की कोशिश कर रहे हैं. इसके लिए बैंक से कर्ज लेकर पोल्ट्री फार्म की स्थापना की है.

लॉकडाउन में पोल्ट्री का कारोबार ठप हो गया था. लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद कारोबार में तेजी आई, लेकिन अब कई पोल्ट्री किसानों को मुर्गियों पर बर्ड फ्लू होने का डर है. इसलिए उन्हें कम कीमत पर मुर्गियों को बेचना पड़ रहा है. नागपुर जिले में कई पक्षियों की मौत के कारण, पोल्ट्री व्यापारियों के बीच एक डर है कि उनके जिले में तो संक्रमण नहीं फैलेगा.