Water Tank

पालांदुर (का). मूलभूत सुविधाओं की पूर्ति के लिए राज्य सरकार कटिबद्ध है और अनेक योजनाओं के जरूरी निधि भी उपलब्ध कराती है, लेकिन योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले विभाग की ओर से काम पूरा होने के बाद भी ध्यान न दिए जाने की वजह से योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पातीं. इस बात का खुलासा पालांदुर/चौरास जलापूर्ति योजना के बारे में हुआ है.

विशेष रूप के यहां की जलापूर्ति योजना की पूर्ति के प्रमाण पत्र के लिए 11 वर्ष की प्रतीक्षा करनी पड़ी. इस कारण जलापूर्ति विभाग की ओर से किया गया मनमाना कामकाज सामने आया है. ग्रामीण परिसर में पारंपरिक जलस्त्रोत से दूषित जलापूर्ति होने से भंडारा शहर के कई लोगों को जल से होने वाले रोगों का सामना भी करना पड़ा है.

अशुद्ध पानी पीने की वजह से कुछ लोगों की मौत भी हुई है. शहर के लोगों को दूषित जलापूर्ति से स्थायी तौर पर मुक्ति दिलाने के लिए केंद्र सरकार की ओर से भारत निर्माण कार्यक्रम के अंतर्गत  जलापूर्ति योजनाओं को मंजूरी देकर इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से शुद्ध तथा स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाया.

पालांदुर चौरासी की जनसंख्या 6000 है. इन लोगों के लिए जलापूर्ति योजना होनी चाहिए, इसके लिए ग्राम पंचायत ग्रामसभा का आयोजन करके ग्रामीण जलापूर्ति तथा स्वच्छता समिति की स्थापना की गई. इसी तरह 10 प्रतिशत धनराशि जनता के सहयोग से एकत्र करने संबंधी प्रस्ताव पारित करके उसे भंडारा जि.प. के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता के पास भेजा गया.

संबंधित विभाग के अभियंता ने दर्शाई गई जगह का निरीक्षण करके जलस्त्रोत, जलकुंभ, पाईपलाईन, स्वीच रूम, पंप हाऊस के बारे में 1 करोड़, 25 लाख, रुपए का बजट तैयार करके उसे स्वीकृति के लिए महाराष्ट्र जीवन प्राधिकरण मंडल, नागपुर के अधीक्षक अभियंता के पास भेजा गया. अधीक्षक अभियंता ने अप्रैल, 2008 में 1 करोड़, 24 लाख, 800 रूपए के बजट को मंजूरी दे दी.

प्रशासकीय मंजूरी के बाद जलापूर्ति योजना का काम शुरु हुआ और एक वर्ष में ही काम पूरा भी हो गया. गांव वालों को इस योजना से जल की आपूर्ति भी की गई. लेकिन जलापूर्ति विभाग के अभियंता की लापरवाही के कारण इस योजना की पूर्ति का प्रमाण पत्र नहीं दिया गया. जलापूर्ति योजना का काम पूरा होने के 11 वर्ष बाद नवंबर, 2019 में इस परियोजना को पूर्ण होने का प्रमाण पत्र दिया गया. इस परियोजना की पूर्णता का प्रमाण पत्र देने में 11 वर्ष का समय लगने से इस बात का खुलासा हो गया है कि जलापूर्ति विभाग की कार्य प्रणाली कैसी है.