Antibodies have been formed in 57% of the people living in the slums of Mumbai: study
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भंडारा. 3 दिवसीय जनता कर्फ्यू में शहर की बड़ी सडकें व मेन मार्केट में खामोशी थी, किंतु शहर के पूर्व हिस्सा जिसमें घनी आबादी है, वहां जनजीवन आम दिनों की तरह ही था. क्षेत्र से नप में प्रतिनिधित्व करनेवाले नगरसेवक नितिन धकाते का मानना है कि प्रशासन को घनी आबादी पर ध्यान केंद्रीत करना चाहिए.

नितिन धकाते ने नवभारत-नवराष्ट्र के मन में है विश्वास अभियान में कहा कि शहर का पूर्वी हिस्सा, जिसमें मेंढा परिसर, डा. आंबेडकर वार्ड, चांदनी चौक से लेकर जिला अस्पताल का हिस्सा शामिल है. बड़ बाजार की सब्जी मंडी भी शामिल है. यह पूरा हिस्सा कोरोना की दृष्टि से बेहद संवेदनशील है. जिले में जब कोरोना से 58 मौते हुई है. यह आंकड़ा भयावह है.

शराब भट्टियों पर छापे
धकाते ने बताया कि घनी आबादी, एक-दूसरे से सटे और छोटे मकान, सार्वजनिक नल पर पानी भरने की मजबूरी आदि कारणों की वजह से लोग अपने घरों में कैद नहीं रह सकते. इसके अलावा अगर इलाके में शराब भट्टियां हैं. जहां पर एक गिलास से कई लोग शराब पीते हैं. सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ चुकी है. इन हिस्से में मास्क पहनने, हाथ धोने जैसे अच्छी बातों के लिए जनजागरण जरूरी है. प्रशासन को इस पर ध्यान केंद्रीत करना चाहिए.

नगरसेवकों को विश्वास में लेना जरूरी
जनता कर्फ्यू को सफल बनाने के लिए नगरसेवकों को विश्वास में लेने की जरूरत है. प्रभाग निहाय रणनीति बनानी चाहिए. कोरोना के खतरे को कम किया जा सकता है. क्योंकि समय रहते अगर काम शुरू नहीं किया जाता है, कोराना की स्थिति आऊट आफ कंट्रोल भी हो सकती है.