किसानों पर दोबारा बुआई का संकट, नहीं बढ़ रहे रोप

भंडारा. जिले में खरीफ फसल में 50 प्रतिशत के अधिक बुआई का काम पूरा हो गया है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वर्षा नहीं होने की वजह से किसानों के सामने दोबारा बुआई का संकट उत्पन्न हो गया है. वर्षा के अभाव में अनेक स्थानों पर लगाए गए रोप में वृद्धि ही नहीं हुई. कुछ स्थानों पर बीज के बोगस निकलने के कारण कुछ भी नहीं उगा.

रबी में हुआ नुकसान
कोरोना के कारण मार्च माह के अंतिम 6 दिन और उसके बाद के अप्रैल, मई तथा वर्तमान जून माह के 27 दिन किसानों के लिए आर्थिक संकट वाले ही रहे हैं. रबी की फसलों को बहुत ही कम दर मिलने के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान सहना पड़ा था. बहुत से किसानों को अपनी फसलों को उचित भाव नहीं मिलने के कारण उनके चेहरों पर नाराजी स्पष्ट तौर पर देखी गई. 

नहीं हो रही बारिश
मौसम विभाग ने कहा था कि इस वर्ष पिछले कई वर्षो की तुलना में ज्यादा वर्षा होगी, लेकिन मानसूनी वर्षा के आरंभिक रुझान ने एक बार फिर किसानों को रोने के लिए मजबूर कर दिया है. मानसूनी वर्षा के रूख से पिछले कई वर्षो से भंडारा जिले के किसान अच्छी तरह से रुबरू हुए हैं, उन्हें वर्षा का मिज़ाज का अंदाजा पहले से ही था. मानसूनी वर्षा के कुछ दिनों के आगमन के बाद उसने जिस तरह से विराम लिया है, वह विराम ज्यादा दिनों तक न रहे.

मानसूनी वर्षा आम नागरिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण भले ही न हो, लेकिन किसानों के लिए मानसूनी वर्षा किसी अमृत से कम नहीं होती. इसलिए हर किसान मानसूनी वर्षा को अमृत जैसा महत्वपूर्ण मानता है, लेकिन चंद दिनों तक बरसने के बाद वर्षा के अचानक विराम लेने से किसानों के चेहरे उदास जरूर हो गए हैं.