Ayurvedic treatment
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भंडारा (का). वैदिक काल में आयुर्वेद के प्रति लोगों का रुझान बहुत ज्यादा था. ब्रिटिश काल से पहले भारत में आयुर्वेद को महत्वपूर्ण स्थान था. ऐलोपैथी उपचार के कारण मिलने वाले जल्दी उपचार के कारण आयुर्वेद उपचार के प्रति लोगों का रूझान कर हो गया और लोग उपचार के लिए ऐलौपैथी को अपनाने लगे.

ग्रामीण क्षेत्र के आने वाले मरीजों की आयुर्वेदिक पद्धति के प्रति ज्यादा लगाव होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में आयुर्वेदिक इलाज तो बढ़ा ही शहरी क्षेत्र में भी आयुर्वेदिक उपचार को मान्यता मिलने लगी. पक्षाघात, हड्डी दुखने, भंगदर तथा बवासीर जैसी बामारियों का उपचार अच्छी तरह से होता है. विश्व भर में कोरोना महामारी के कारण लोगों में भय का वातावरण बना हुआ है.

छह माह की कालावधि में कोरोना के उपचार के लिए कोई दवा या टीका नहीं आया है. आयुर्वेदिक अस्पतालों की तरफ लोगों का ध्यान कोरोना के काल में ज्यादा ही बढ़ गया है. आयुर्वेदिक दवाओं के साथ-साथ होमियोपैथी के प्रति भी लोगों का रुझान पहले की तुलना बढ़ा है. आज के आधुनिक युग में विभिन्न मशीनों से उपचार की पद्धति विकसित की गई है, लेकिन खर्चीली चिकित्सा पद्धति होने के कारण अब ऐलोपैथी उपचार पद्धति सभी के सहज संभव नहीं है.