ड्रम सीडर तकनीक का उपयोग कर खेती करें, बोरकर ने किया आह्वान,  मोहाड़ी तहसील में पहला प्रयोग

    मोहाड़ी. खरीफ सीजन के दौरान बारिश में अनियमितता दिखाई दे रही है. भारी बारिश से किसान बेहाल हो गए हैं. धान नर्सरी खराब होने पर दोहरी बुआई के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. इस तरह का संवेदनशील मौसम परिवर्तन निश्चित रूप से कृषि क्षेत्र में धान की उत्पादकता को प्रभावित करेगा.

    अतः भंडारा में ग्रामीण युवा प्रगतिशील मंडल की ओर से धान की खेती के लिए जिले के किसानों द्वारा  ड्रम सीडर  नामक कम लागत वाली तकनीक का उपयोग धान बुआई के लिए किया जाए इसलिए ड्रम सीडर का पहला प्रयोग तहसील में आयोजित किया गया. यह प्रयोग तहसील के कवडसी, खुर्चिपार, टाकली तथा कान्हंलगाव के युवा किसान मनोज कस्तुरे के खेत पर हालही में किया गया. ग्रामीण युवा प्रगति मंडल के सचिव अविल बोरकर ने किसानों से कहा कि किसानों ने ड्रम सीडर पद्धति का उपयोग खेत में करें. 

    किसानों का किया गया मार्गदर्शन

    इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता विलास केजरकर, हरदोली सरपंच सदाशिव ढेंगे, इंजिनीअर चेतन सव्वालाखे, पट्टू लिल्हारे, किसान मनोज कस्तुरे  उपस्थित थे. इस दौरान उपस्थित किसानों को ड्रम सिडर के महत्व के बारे में बताया. ड्रम सिडर तकनीक का उपयोग करके धान बीजों के पौधों को सीधे बोया जा सकता है.

    बीजों को रातभर पानी में भिगोकर अंकुरित करना चाहिए. इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि ज्यादा देर तक अंकुरित न हों क्योंकि इससे बीज आपस में चिपक सकते हैं और ड्रम सिडर में रह सकते हैं. रात को भीगे हुए बीजों को बुआई से पहले छाव में सुखाना चाहिए. बुआई से पहले खेत में कीचड़ होना चाहिए और अतिरिक्त पानी लेना चाहिए. जब ड्रम साइडर द्वारा बोया जाता है, तो खेत में दो पंक्तियों की दूरी 20-20 सेमी और दो रोपाई के बीच की दूरी 5 से 10 सेमी तक कम की जा सकती है.

     बोरकर ने कहा कि  विधि का उपयोग मिट्टी से बने समानांतर खेतों पर किया जा सकता है. साथ ही विलास केजरकर ने तकनीकी मार्गदर्शन एवं प्रदर्शन के माध्यम से ड्रम सिडर की जानकारी दी. चूंकि ड्रम सीडर का वजन 2 किलो होता है, इसलिए इसे एक या दो मजदूरों की मदद से सीधी रेखा में बोया जा सकता है.

    आधे घंटे में आधा एकड़ लगाया जाता है. अधिकांश ड्रम सीडर हल्का होता है क्योंकि यह प्लास्टिक से बना होता है. इसे एक जगह से दूसरी जगह ले जाना आसान है. चूंकि ड्रम सीडर के हिस्से प्लास्टिक से बने होते हैं, इसलिए कम प्रबंधन की आवश्यकता होती है. यह किसानों के लिए सस्ती और पैसों में बचत होती है. यदि धान को ड्रम सीडर की सहायता से बोया जाए, तो उपज 20 से 25 प्रश. अधिक होने की संभावना है.  पिछले 15-20 वर्षों से बोरकर पारंपरिक बीजों की खेती कर रहे हैं.  

      किसान मनोज कस्तूरे ने ड्रम सीडर के माध्यम से आधा एकड़ भूमि पर अंकुरित धान बीज की बुवाई की. हरदोली के सरपंच सदाशिव ढेंगे ने कहा कि यदि ड्रम सीडर के माध्यम से धान लगाया जाता है, तो अल्पसंख्यक किसानों के लिए श्रम लागत और समय की बचत किए बिना ड्रम सीडर के माध्यम से धान की खेती करना फायदेमंद होगा. मोहाडी तहसील में ड्रम सीडर के माध्यम से धान की रोपाई का यह पहला प्रयोग है.