सात वर्ष की प्रतीक्षा के बाद गांव में पेयजल की सुविधा

लाखांदूर (कां). मुरामाड़ी में लाखों रुपए खर्च करके जलापूर्ति योजना का काम शुरु किया गया, लेकिन पानी का स्त्रोत बंद होने क कारण सात वर्ष से पेयजलापूर्ति पाइप लाइन का काम अधर में लटक गया था. ग्राम पंचायत कमेटी के प्रयासों के कारण गांव में पेयजलापूर्ति योजना शुरु की गई और सात वर्ष की लंबी प्रतीक्षा के बाद गांववालों को गांव में ही पेयजल की व्यवस्था कर दी गई है.

जिला परिषद ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के अंतर्गत 2013-14 में मुरमाडी में 40 लाख रूपए खर्च करके नल योजना का निर्माण किया गया. पेयजलापूर्ति शुरु होने के आठ दिन बाद ही पानी का स्त्रोत ही बंद हो गया, जिससे गांव में पेययल का संकट उत्पन्न हो गया, उसके बाद पहले की ही  गांववालों को पेयजल के लिए लंबा फासला तय करना पड़ रहा था.

जल स्त्रोत बंद होने के बाद यह योजना सफेद हाथी साबित हो रही थी. वर्तमान ग्राम पंचायत कमेटी ने आगे आकर नए सिरे से नल योजना की मरम्मत का काम हाथ में लिया और आज स्थिति यह है कि अब मुरमाडी गांव के लोगों को एक बार फिर पेयजलापूर्ति की जाने लगी है. इस वजह से गांववालों में आनंद की लहर व्याप्त है.

तहसील का मुरमाडी गांव की जनसंख्या1600 है. यहां पहले पीने के पानी के स्त्रोत के रूप में केवल दो हैंडपंप ही थे, इस वजह से गांव में हमेशा ही पेयजल संकट बना रहता था. 2012-13 में नल योजना के साथ 45 हजार लीटर क्षमता वाली टंकी के निर्माण की मंजूरी दी गई. तत्कालीन ग्राम पंचायत कमेटी ने निर्माण कार्य एजेंसी का काम पूरा करके जांच भी की थी. आठ दिन इस योजना से गांव में जलापूर्ति करने वाला स्त्रोत बंद हो गया.

2018-19 में बंद हुई योजना को शुरु करने के लिए सरपंच स्वर्णलता सोनटक्के, उप सरपंच लांजेवार, ग्राम सेवक हेडाऊ तथा ग्राम पंचायत सदस्य ने पंचायत समिति तथा ग्रामीण जलापूर्ति उपविभागीय अधिकारी के पास बार-बार प्रस्ताव रखा. बार-बार बंद पड़ी पानी योजना की मरम्मत करने का मुद्दा उठाने के कारण जिला प्रशासन ने जल किल्लत निवारण के लिए विशेष मरम्मत के काम को मंजूरी दी. इसके बाद ग्राम पंचायत ने तुरंत काम शुरु करके रिकार्ड समय में बंद पड़ी पाइप लाइन को शुरु कर दिया. ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता शर्मा, वैज्ञानिक विशाल मंत्री, पंचायत समिति के खंडविकास अधिकारी द्वारा सहयोग करने के कारण ग्राम पंचायत ने गांव में वर्षो से चले आ रही पेयजल समस्या का स्थायी हल हो गया है.