Experts will investigate signatures, fake bill cases of 74.80 lakh

    भंडारा. गांवों को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन वास्तव में देखा जाए तो आज भी जिले में कई गांव ऐसे हैं, जो खुले में शौच से मुक्त नहीं हुए हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच से मुक्ति के लिए लाखों रूपए खर्च किए गए लेकिन उसका कोई उपयोग नहीं हुआ. सरकार ने इस योजना को अमल में लाने के लिए शौचालय निर्माण कार्य के लिए अनुदान दिया. लेकिन शौचालय बनने के बाद भी गांव के अधिकांश लोगों ने खुले में ही शौच के लिए जाते हैं.

    ग्रामीण क्षेत्र में खुले में शौच में जाना जैसे परंपरा ही बन गई है. गांव के कुछ सुधि जनों खुले में शौच की गंदी प्रथा को बंद करने के लिए गांव-गांव में शौचालय बनाने की जोरदार मांग की और सरकार को जब यह लगा कि इस योजना से गांव गंदगी से मुक्त हो जाएंगे तो सरकार ने इसके लिए अनुदान देने का मन बनाया.

    सरकार की ओर से खुले में शौच से मुक्ति के लिए दिए गए अनुदान से गांवों में शौचालय तो बने लेकिन इन शौचालयों में जाने के प्रति किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखायी. एक सर्वेक्षण से इस बात का खुलासा हुआ है कि गामीण क्षेत्रों में आज भी 70 प्रतिशत लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं.

    राज्य में वर्ष 2000 से संत गाडगे बाबा ग्राम स्वच्छता अभियान के गांव की स्वच्छता तथा गांव के लोगों के स्वास्थ्य तथा गांव के लोगों का जीवन स्तर सुधारने का लक्ष्य रखा गया. वर्ष 2004 से संपूर्ण स्वच्छता अभियान हाथ में लिया गया. 2005 से देश में निर्मल ग्राम योजना शुरु की गई.

    केंद्र सरकार की ओर से शुरु की गई इस योजना के तहत सन् 2008 में बहुत काम किया गया. ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय का निर्माण क्यों जरूरी है, यह बात लोगों के मन में भरी गई. 2008 में ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर शैचालयों का निर्माण तो किया गया लेकिन इन शैचालयों का उपयोग नहीं के बराबर किया गया, इस वजह से गांवों को शौच के मुक्त करने का ऐलान सिर्फ ऐलान बनकर ही रह गया.

    सरकारी अनुदान देकर बनाए शैचालय गांव में शो पीस बनकर रह गए हैं. गांव में सुबह के समय शौच रूपी जो गंदगी फैलायी जाती है, वह गंदगी कैसे समाप्त होगी यह बहुत बड़ा प्रश्न है. सरकारी अनुदान से बने शैचालय का ही उपयोग करने की अनिवार्यता जब तक नहीं की जाएगी, तब तक गांव को खुले में शौच के अभिशाप से मुक्ति नहीं मिलेगी.