बावनथड़ी जलाशय का पानी तुरंत छोड़ा जाए, किसानों ने की अधिकारियों की मांग

सालई (खुर्द). दिन में तेज धूप के कारण आम लोगों के बीच यह चर्चा हो रही है कि सितंबर माह में इतनी धूप कैसे हो रही है. अक्टूबर हिट के बारे में तो लोगों को जानकारी है, लेकिन सितंबर में इतनी धूप कभी नहीं रही. मानसूनी वर्षा ने पिछले दिनों कहर बरपाया था. लेकिन वर्तमान में हालत यह है कि वर्षा ने मुंह मोड़ लिया है. वर्षा न होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. मानसूनी वर्षा शुरुआत में अच्छी हुई, जिससे किसानों के चेहरे पर मुस्कान खिल उठे थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से वर्षा न होने से बहुत से क्षेत्रों के जलाशयों, नदियों के जलस्तर में काफी गिरावट आई है. वर्षा न होने से किसान चिंतातुर हो गए हैं और यह सोच रहे हैं कि खेतों में लगी धान की फसल को कैसे बचाया जाए?  

सालई खुर्द के किसानों की नींद इन दिनों इसलिए उड़ गई है कि उन्हें धान की फसल हाथ से जाती हुई दिखायी दे रही हैं. जल के अभाव में खेत की जमीन दरकने लगी है. जल के अभाव में जमीन दरकने की जानकारी बावनथड़ी जलाशय परियोजना के वरिष्ठ अधिकारियों को अच्छी तरह से होने के बावजूद गलत नीतियों के कारण किसानों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. सच पूछा जाए तो बावनथडी जलाशय परियोजना किसानों के लिए सफेद हाथी साबित हुआ है.

पिछले एक पखवाड़े में भंडारा जिले के साथ-साथ सालई खुर्द, उसर्रा, आंधलगांव, डोंगरगांव, बपेरा सिहरी, रामपुर, काटेबाम्ही, टांगा, पालडोंगरी, आंबागड में वर्षा नहीं के बराबर हुई है. वर्षा न होने के कारण इन क्षेत्रों के किसानों को धान की फसल से हाथ धोने की स्थिति उत्पन्न हो गई है. कड़ी धूप के कारण धान के साथ-साथ अन्य फसलों के भी बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है. अगर इस वर्ष सूखा पड़ा तो किसानों की हालत क्या होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है. कुछ किसानों का यहां तक कहना है कि अगर राज्य सूऱा पड़ा तो हम मदद के लिए सरकार के द्वार पर जाएंगे. सालई खुद के किसानों ने बावनथड़ी परियोजना के अधिकारियों से अपील की है कि पानी के अभाव किसानों की फसल नष्ट होने से पहले ही बावनथड़ी जलाशय का पानी छोड़ा जाए ताकि उन फसलों को बचाया जा सके, जो नष्ट होने की कगार पर पहुंच चुकी है. अशोक पटले, किशोर भैरम, भोला पारधी, श्रीकांत बंसोड, प्यारे लाल दमाहे, टीकाराम आंबाडारे, गोपाल लिल्हारे, शैलेश लिल्हारे, ईश्वर दमाहे, अशोक दमाहे, भीमा ठाकरे, शिवदास लिल्हारे, राम प्रसाद बघेले, सुरेश मांढ़रे, संकपाल ठाकरे, झनकलाल दमाहे, अशोक दमाहे, रोशन अटराहे, अरविंद सव्वालाखे, दयशवंत अटराहे, नीतेश लिल्हारे आदि ने बावनखड़ी परियोजना के अधिकारियों से अपील की है कि किसानों की फसल बचाने के लिए बावनखड़ी जलाशय का पानी छोड़ा जाए, ताकि किसानों उन फसलों को जीवनदान मिले, जिन्हें पानी की सख्त जरूरत है.