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भंडारा. किसानों पर प्रकृति का कोप लगातार जारी रहता है. प्रकृति हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी अपना कोप दिखाने में पीछे नहीं रही. धान समेत अन्य फसलों की तरह कपास की फसल पर भी प्रकृति का कोप बरपा है. कपास के उत्पादन खर्च में लगातार वृद्धि होने के कारण किसानों के चेहरे मुरझा गए हैं. पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कपास के प्रति क्विंटल भाव में 1200 रुपए प्रति क्विंटल की कमी आने से किसानों के चेहरे उदास हो गए हैं.

भंडारा जिले की मोहाड़ी तहसील किसानों ने  कुछ हेक्टर क्षेत्र में इस वर्ष कपास की फसल लगायी है. पिछले वर्ष पहली बार कपास का प्रति क्विंटल भाव 5000 से 5200 रूपए बोला गया था, लेकिन इस वर्ष कपास का प्रति क्विंटल 4000 रुपए बोला जा रहा है. एक तरफ प्रति क्विंटल भाव में कमी तो दूसरी ओर मजदूरों की बढ़ी हुई मजदूरी किसानों का आर्थिक संकट बढ़ा रही है. गोबर की जगह रासायनिक खाद का उपयोग बढ़ने भी किसानों का उत्पादन खर्च दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है.

कीटनाशकों की कीमत बढ़ने से किसानों का पूरा का पूरा बजट गया है. वर्ष के 12 माह में चार माह गर्मी, चार माह वर्षाकाल तथा चार माह शीतकाल के होते हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से ये तीनों प्रमुख ऋतुएं पहले की तरह अपने निर्धारित समय से आ और जा नहीं रही हैं. इस वर्ष की खरीफ की फसल किसानों के लिए नुकसानदायक साबित होने वाली है. कपास को कम भाव मिलने के कारण कपास उत्पादक किसानों के हौसलेपस्त हो गए हैं.