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खमारी (बुटी). जिन किसानों के खेत नदी तट पर स्थित हैं, वे  अपनी धान की फसल बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं. वैनगंगा नदी में आई बाढ़ से जिन किसानों को भारी नुकसान सहना पड़ा हैं, वे अपनी धान की फसल बचाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं. अगस्त माह के आखिरी सप्ताह में भंडारा जिले के साथ-साथ पूरे विदर्भ में मूसलाधार वर्षा होने की वजह से वहां के किसानों को अपनी फसल से हाथ धोना पड़ा.

वर्षा के कारण हुई तबाही का का सामना अभी भी बहुत से किसानों को करना पड़ रहा है.  वैनगंगा नदी में आई बाढ़ का पानी खेतो, खलिहानों में ही नहीं कई गांव में भी घुस गया है, जिससे वहां का जनजीवन प्रभावित हुआ है.

धान के बांघ में बाढ़ का पानी प्रविष्ट होने की वजह से बांध का कुछ हिस्सा फूट गया. तीन दिन की बाढ़ में धान की मेढ़ टूटने से कुछ किसानों के धान के रोप पानी में बह गए. लेकिन जो धान की फसल बची है, उसके लिए तालाब, बोडी के किसान ऑईल इंजन को माध्यम से धान की फसल बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं. इस कारण खमारी (बुटी) के किसानों के खेतों से इन दिनों ऑइल ईंजन की आवाज लतागार सुनायी देती है.