Farmers
Representational pic

    भंडारा (का). धान उत्पादक भंडारा जिले में 70 फीसदी किसान के लिए धान ही एकमात्र फसल है, जो वह अपने खेत में ले सकते हैं. पिछले वर्ष राज्य सरकार ने धान के लिए 700 रु. प्रति क्विंटल बोनस घोषित किया था. समर्थन मूल्य के अलावा प्राप्त होने वाली बोनस की राशि मिलने की उम्मीद में किसान कई परेशानियों का सामना करते हुए धान खरीदी केंद्रों तक पहुंचे एवं लंबे इंतजार के बाद अपने धान को बेचा. किंतु पिछले खरीफ एवं ग्रीष्मकालीन मौसम खत्म हो चुका है. महीनों के इंतजार के बाद भी किसानों के बैंक खाते में बोनस की रकम जमा नहीं हुई है. कोरोना के अलावा प्राकृतिक आपदा की वजह से पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहा है. वर्तमान में अब जब नई फसल की तैयारी हो रही है.  किसान बेहद चिंतित है. उसे समझ नहीं आ रहा है कि वह नई फसल के लिए कहां से तैयारी करें.

    कब होगा वादा पूरा

    सरकारी धान खरीदी केंद्र पर 1 ग्रेड के धान को 1828 रूप है ओ बी ग्रेड के धान को रु. 1868 प्रति क्विंटल धान दिया गया था. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ में कांग्रेस को धान को 2,500 रु. का दाम इस चुनावी नारे को सफलता मिली. इसके बाद इस नारे को राज्य के विधानसभा चुनाव में चलाया गया. सत्ता में आने के बाद में महाआघाड़ी सरकार ने  केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य के अलावा रु. 700 प्रति क्विंटल बोनस के तौर पर देकर किसानों को यह बताने की कोशिश की कि उसने अपना वादा पूरा किया है. किंतु किसानों की मानें तो उनके लिए 700 रु. बोनस यह अब भी सब्जबाग ही साबित हो रहा है. क्योंकि लंबा समय बीत जाने के बाद भी रु.700 प्रति क्विंटल बोनस की राशि उनके खाते में जमा नहीं हुआ है.

    धान खरीदी केंद्र के लगा रहे चक्कर

    किसानों की माने तो धान खरीदी केंद्र पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अतिरिक्त बोनस के वादे से प्रभावित होकर उन्होंने धान खरीदी केंद्र पर धान बेचा. लेकिन अब तक बोनस नहीं मिलने से किसान चिंता में हैं. बोनस राशि के संबंध में धान खरीदी केंद्र के चक्कर लगा रहे हैं. 

    लागत खर्च बढ़ गया, पैसे का जुगाड़ कहां से करें

    संबंधित संस्था के कर्मचारी भी जवाब देते देते थक चुके हैं. अब तक बोनस का पैसा खाते में जमा नहीं हुए है. इस वजह से नई फसल के लिए किसानों पर अतिरिक्त पैसे का बोझ पड़ रहा है. पैसे का जुगाड़ कहां से करें? इसकी चिंता किसानों के समक्ष उपस्थित हुई है. धान की खेती सस्ती नहीं रही है. हल जोतने से लेकर, बीज खरीदी, उर्वरकों की खरीदी, कीटकनाशक एवं मजदूरों की मेहनताना भुगतान के लिए पैसे जुटाने की दिक्कत हो रही है. 

    किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते राज्य सरकार द्वारा किसानों के बैंक खाते में धान के बोनस रकम तत्काल जमा करने की मांग हो रही है.

    किसान बाबूराव ठवकर ने बताया कि किसानों ने पिछले वर्ष के मौसम में धान खरीदी केंद्र पर धान बेचा. उसका चुकारा मिल चुका है. लेकिन राज्य सरकार ने जो घोषणा की थी कि प्रति क्विंटल रु.700 बोनस दिया जाएगा. किसान के खाते में अब तक बोनस की रकम जमा नहीं हुई है. इस वजह से बीज से लेकर अन्य सभी खर्चों के लिए पैसों की दिक्कत पैदा हो रही है.