Mirchi

भंडारा (का). जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है, ऐसे किसानों के लिए आर्थिक उन्नति का मार्ग बहुच सहज है, उनके लिए आज के तकनीकी युग में अनेक मार्ग खुले हैं. नित नई तकनीक के कारण कैसे प्रगति की जाए, इस बारे में किसान गंभीरता से विचार करने लगे हैं.

भंडारा वैसे तो धान के उत्पादन के लिए ख्यात है. फलों में सीता फल का उत्पादन भी यहां बहुत होता है, लेकिन आज के दौर में हरी का उत्पादन करके किसान ज्यादा से ज्य़ादा मुनाफा कमा रहे हैं.

हरी मिर्च का तीखापन किसानों को ज्यादा आय दिलाकर उनके चेहरों पर प्रसन्नता दे रही है. किसान मिर्ची उत्पादन के प्रति इसलिए विशेष रूप से उत्साही हैं, क्योंकि मिर्ची की फसल के लिए काली, कसकदार या मध्यम जमीन बहुत अच्छी मानी जाती है.

मिर्ची की रोपाई करने के दो-तीन माह बाद ही मिर्ची की फसल तैयार हो जाती है. जून माह में मिर्ची के रोप तैयार करने के लिए जमीन तैयार करनी पड़ती है. उसके बाद उस खेत में गोबर की खाद बारीक करके डाली जाती है. इससे पहले खेत की सिंचाई करनी पड़ती है. मिर्ची की फसल पर कीड़े न लगे, इसके प्रति किसान को विशेष रूप से ध्यान देना पड़ता है.