2 borewells in 1 campus, bypassing rules
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भंडारा. शहर में स्वच्छ जलापूर्ति नहीं होने से लोगों के स्वास्थ्य पर असर हो रहा है. नागरिकों ने प्रशासन से इस ओर ध्यान देने की अपील की है. अस्वच्छ परिसर नलवाहिनी के लिए किए गए गड्डे, ब्लिचिंग पाउडर का योग्य इस्तेमाल नहीं होने से पानी दूषित हो रहा है.

बढ़ेगा संक्रमण का खतरा
इस कारण कालरा, विषमज्वर, पीलिया, गैस्ट्रो, टायफाइड, बुखार आदि संक्रमित बीमारियों के संक्रमण का खतरा हो सकता है. खेती में रासायनिक खादों के इस्तेमाल की वृद्धि के कारण पानी में लोह, प्लाराइड, क्लोराइड, क्षार, टीडीएस, कैल्शियम, मैग्नेशियम, नायट्रेट, सल्फेट आदि घटकों की वृद्धि होती है. 

होंगी यह बीमारियां
दूषित पानी की वजह से पथरी, फ्लोरोसिस, बच्चों में विकलांगता, जैसी बीमारियां हो सकती हैं. रासायनिक दूषित पानी से बचाव के लिए बिजली के फिल्टर की आवश्यकता रहती है, किंतु आम लोगों को इतने बड़े पैमाने पर खर्च करना संभव नहीं है. जैविक एवं रासायनिक दूषित पानी के लिए उपाययोजना करने की जिम्मेदारी जनता तथा सरकार इन दोनों की ही है. 

बरते सावधानियां
इसके लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र के लोगों ने पीने के पानी का संग्रहण करते समय पानी की टंकी, घागर, मटका सप्ताह में एक बार स्वच्छ करने के पश्चात उसमें पानी भरें एवं पानी उंचाई पर रखें. शौचालय, गंदा पानी, मवेशियों के मलमूत्र से पीने का पानी दूर रखें. शुद्धीकरण के लिए फिटकरी का इस्तेमाल करें. स्वास्थ्य सेवकों ने भी जलसुरक्षक द्वारा जैविक एवं रासायनिक नमूने नियमित तरीके से प्रयोगशाला में भेजना चाहिए.