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  • धान उत्पादक किसानों को मिला दिलासा

लाखनी. पितृमोक्ष अमावस्या के दिन आधी रात के दौरान गाज व बिजली के साथ तहसील में बारिश आने से धान उगाने वाले किसानों को लाभ हुआ. चूंकि तहसील में कोई बड़ी या मध्यम सिंचाई परियोजना नहीं है. इसलिए अधिकतम खेती असिंचित है, क्योंकि केवल बारिश के पानी पर निर्भर है. असिंचित किसान 90 से 110 दिनों में निकलनेवाले हलके प्रजाति की धान फसल लगाते हैं. मामा तालाब व कुएं के माध्यम से सिंचाई की सुविधा वाला किसान 110 से 135 दिनों में निकलनेवाले मध्यम व उच्च प्रजाति के धान की बुआई करते है.

वर्तमान में धान की हल्की किस्म परिपक्वता के कगार पर है. धान के लिए पानी की आवश्यकता रहती है. पिछले सप्ताहभर से बारिश ने दस्तक नहीं देने के कारण धान उत्पादक चिंतित हुए थे. किंतु गुरूवार को पिंपलगाव, मुरमाडी तूप, पालांदूर परिसर में झमाझम बारिश ने दस्तक दी. धान उत्पादक किसानों को कुछ प्रतिशत राहत मिली है.

बिजली आपूर्ति खंडित होने से उमस का सामना करना पड़ा. 7 से 8 घंटों के बाद बिजली आपूर्ति व्यवस्थित की गई. एक से डेढ़ घंटे तक बिजली कड़कने की आवाज शुरू थी. इस बीच कोई जीवितहानि नहीं हुई. दिघोरी के हरि लसवंते, बाबूराव लांबकाने व गुलझारी पात्रीकर के घर के पास गाज गिरने से बिजली आपूर्ति खंडित हुई.