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  • लोगों में नहीं दिख रहा उत्साह, नहीं उड़ेगा गुलाल

भंडारा. हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी रंगों पर्व होली के प्रति लोगों में उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है. हालांकि भंडारा जिले के शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में होली पर्व पर उपयोग में होली सामग्रियों की दूकानें लगी हैं, लेकिन इन दूकानों में खरीददारों की संख्या नहीं के बराबर है. कहा जा रहा है कि कोरोना के भय से इस वर्ष लोगों में होली न खेलने का मन बनाया है.

दूकानों में ग्राहकी कम

भंडारा के सभी मुख्य बाजारों में होली सामग्री की दूकानें  लगी हैं, लेकिन इस बार दूकानों की संख्या भी कम है और वहां सामान खरीदने आने वाले ग्राहकों की संख्या में भी गिरावट आई है. गांधी चौक, राजी गांधी चौक, खात रोड, जलाराम चौक समेत शहर के अन्य मुख्य चौक पर रंग- गुलाल की दूकानें तो सजी हैं, लेकिन वहां ग्राहकों की संख्या बहुत कम है. बेमौसम वर्षा और कोरोना इन दोनों की वजह से इस बार होली का रंग फीका ही रहने के पूरे आसार हैं. 28 मार्च को होलिका दहन के बाद 29 मार्च को धुलिवंदन है और इस होली पर्व पर एक-दूसरे को रंगों से सराबोर करने की परंपरा का अनुपालन महाराष्ट्र के अन्य जिलों की तरह भंडारा में भी हो रहा है, लेकिन कोरोना के कहर के भय से लोगों ने इस वर्ष होली न मनाने का संकल्प लिया है. 

होली के पूर्व ही धूप के चटके 

मार्च महीने के दूसरे सप्ताह में धूप के चटके लगने लगे हैं. होली के पूर्व ही सूरज गरमा रहा है. ग्रीष्मकाल में तापमान की क्या स्थिति होगी, इसका असर अभी से दिखायी दे रहा है. होली के पश्चात ही गर्मी बढ़ेगी.   पिछले कुछ दिनों से घर के बाहर निकलते समय धूप के चटके लगने लगे हैं. मार्च एवं इसके पश्चात के महीने में तापमान में वृद्धि होगी. आज के स्थिति में सुबह 10 बजे से ही धूप की प्रखरता ध्यान में लेकर मई महीने में अधिक प्रमाण धूप के चटके लगेगे इसमें संदेह नहीं. होली उत्सव को कुछ ही दिन शेष है फिर भी सूर्यदेव अभी से ही गरमा रहा है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रति वर्ष ग्रीष्मकाल के दिनों में धूप से सुरक्षा करने के लिए जनजागृति की जाती है. आने वाले 4 महीने धूप के चटके नागरिकों को सहना पड़ेगा. 

बेमौसम की बरसात का साया 

इस वर्ष मानसूनी वर्षा से ज्यादा बेमौसम की बरसात हुई है. बिन मौसम की बरसात के कारण खेतों में लगी फसलें बर्बाद हो गई. कोरोना के कारण वैसे भी इस वर्ष लोगों में होली के प्रति उत्साह कम नजर आ रहा है, ऐसे में अगर बेमौसम वर्षा हुई तो होली का बचा-कुचा उत्साह भी खत्म हो जाएगा. उल्लेखनीय है कि जिले में रबी की फसलों पर असर पड़ा है.