राजनेताओं के पैतरों से किसान संभ्रम में, कृषि विधेयक का कितना मिलेगा लाभ

पालांदूर. केंद्र सरकार की ओर से मंजूर किए गए  कृषि विधेयक प्रस्ताव को राज्य में भी तक अमल में नहीं लाया गया है. यह विधेयक किसानों के हितों वाला नहीं  है, ऐसा आरोप राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार पर लगाया जा रहा है. इस विधेयक को लेकर केंद्र सरकार के विरोध में महाविकास आघाडी सरकार के नेताओं ने आवाज बुलंद करते हुए कृषि विधेयक की होला जलाई.  दूसरी ओर भाजपा तथा उसके समर्थक राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस विधेयक को राज्य में लागू करने के लिए राज्य सरकार पर जुर्माना लगाया है. 

यह विधेयक लागु होत ही खुली बाजार व्यवस्था में किसानों की फसल, फल, सब्जी के भाव व्यापारी तय करेंगे, इससे किसानों का शोषण होने की आंशका से इंकार नुहीं किया जा सकता.  केंद्र सरकार के कृषि गणना से   अनुसार भारत के 99 प्रतिशत किसान अल्प आय या अल्प संसाधन प्रवर्ग वाले हैं, इस वजह से उन्हें विक्रय माल विदेश में बेंचने जैसी स्वातंत्र्य मिलेगी, ऐसा कहना  अतिशोयक्ति ही कहा जाएगा.   दूसरी ओर यह विधेयक  किसानों के लिए लाभकारी बताया जा रहा है.

इस विधेयक की वजह से किसानों को  दलालों से स्थायी तौर  पर मुक्ति मिल जाएगी. इतना ही नहीं इस विधयेक से किसान आर्थिक रूप से सबल होगा. केंद्र सरकार का कहना है कि इस विधेयक के माध्यम से किसानों को एक देश, एक बाजार उपलब्ध उपलब्झ होगा, ऐसा दावा भाजपा नेताओं की ओर से किया जा रहा है.