निमोनिया जैसे रोगों का खतरा बढ़ा

भंडारा. हाथों को उचित तरीके से स्वच्छता न किए जाने के कारण अशिक्षित तथा गरीब परिवारों के बच्चों को अतिसार और निमोनिया जैसे रोग का सामना करना पड़ रहा है. बच्चों को अतिसार, निमोनिया जैसे रोगों से दूर रखने के लिए साबुन से हाथ धोने के प्रति जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है. 

आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में बहुत से लोग शौच से लौटने के बाद साबुन से हाथ नहीं धोते हैं. छोटे बच्चों की शौच धोने तथा पशुओं के मल-मूत्र को उठाने के बाद हाथ धोने की आदत अभी भी बहुत से लोगों की नहीं है. बहुत से लोग हाथ साफ है, ऐसा बताकर हाथ धोना टालते है, ऐसा करके वे स्वयं का ही नुकसान करते हैं. कॉलरा के मरीज के शौच में 1 से 100 करोड़ बैक्टीरिया होते हैं. छोटे बच्चे जब जमीन पर खेलते हैं, उस वक्त उनके हाथ गंदे होते हैं, जब बच्चे अपना यही हाथ मुंह में डालते हैं तो बहुत से कीटाणु भी बच्चों के पेट में चले जाते हैं, इससे बच्चों को अतिसार, निमोनिया जैसी बीमारी होने की आशंका रहती है.

हाथ की ऊगंलियों के बढ़े हुए नाखूनों में जमा मैल में भी कीटाणु होते हैं. ये कीटाणु बच्चों की सेहत बिगाड़ने में अहम भूमिका अदा करते हैं. इसलिए जैसे ही बच्चों के हाथ के नाखून बढ़े हुए दिखायी दें, उसे तुरंत काट दें, ताकि नामून के माध्यम से कीटाणु बच्चों के पेट में न जाए और नह अतिसार या निमोनिया जैसी बीमारी का शिकार हो जाए. बीमारियों से बचना है तो हाथ धोते रहना है, जो इस नियम का पालन करता है, वह निरोगी रहता है और जो पालन नहीं करता वह बार-बार बीमार पड़ता है.