खरीफ: इस वर्ष नहीं हुई पर्याप्त बारिश, किसानों ने प्रशासन से की मांग

    • खेतों में सिंचाई के लिए पानी छोड़े

    भंडारा. इस वर्ष पूर्व विदर्भ में पर्याप्त बारिश न होने के कारण अकाल जैसी स्थिति है. जिले के गोसी बांध पर आंबाड़ी टेकेपार, करचखेड़ा, नेरला उपसा सिंचाई योजना के तहत हजारों एकड़ कृषि भूमि की धान नर्सरी सूखने के कगार पर है. फसल को बचाने के लिए किसान कई प्रयास कर रहे हैं.

    हालांकि गोसी परियोजना के तहत आने वाली उपसा सिंचाई योजना का पानी अभी तक नहीं छोड़ने से किसान नाखुश हैं. इस कारण उपसा सिंचाई योजना का पानी तत्काल छोड़ने की मांग का ज्ञापन सिंचाई विभाग, संरक्षक मंत्री को सौंपा गया. 

    आर्थिक संकट से जूझ रहे किसान

    उल्लेखनीय है कि उपसा सिंचाई से पानी छोड़ने के लिए अधिकारियों को बार-बार याद दिलाने के बावजूद पानी छोड़ने का कोई आदेश जारी नहीं हुआ है. कोरोना के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति पहले ही खराब हो चुकी है. 

    अन्यथा करेंगे आंदोलन

    बताया गया कि ग्रीष्मकालीन धान की फसल के लिए भी जलापूर्ति की जाएगी. हालांकि ग्रीष्मकाल के धान को पानी नहीं मिलने से किसान अब दोहरे संकट में है. किसान पूछ रहे हैं कि पर्याप्त जल संग्रहण होने के बावजूद गोसी बांध में पानी क्यों नहीं छोड़ा जा रहा है. इस वर्ष भी किसान अकाल की स्थिति से परेशान है.

    ऐसे में महाराष्ट्र जल संसाधन विभाग को गोसी बांध पर पूरी उपसा सिंचाई योजना का पानी तुरंत किसानों को देने के लिए कार्रवाई का आदेश देना चाहिए, अन्यथा वे सड़कों पर उतरेंगे. जेल भरो आंदोलन करेंगे. यह चेतावनी पूर्व कृषि संवर्धन सभापति नरेश डहारे, संजय मडावी, नाना बडगे, ताराचंद भुरे, क्रिष्णा अतकरी, पुरुषोत्तम जगनाडे, जतन टांगले, चंदन पंचबुद्धे, नत्थु बांते, हितेश बोरकर, नरेश येवले, गजानन कलंबे, शरद तिडके, दिनेश भुरे, दिलिप वाडीभस्मे, विनोद पेशने, दशरथ भुरे, रामलाल पडोले सहित अन्य किसानों ने दी.