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    तुमसर. कोरोना अनलॉक कर्फ्यू का उल्लंघन कर दूकानें खोलने वाले व्यापारियों के खिलाफ महामारी अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज करने एवं जुर्माना वसूलने की कार्यवाही की जाती है. लेकिन राजनीतिक पार्टियों द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाकर आंदोलन एवं प्रदर्शन किए जाते हैं. तब उनके खिलाफ कार्रवाही क्यों नहीं की जाती है.  

    कानून सबके लिए समान

    यदि कानून एवं नियम सबके लिए समान है तो जनता एवं व्यापारियों को भी इससे मुक्ति दिलाना चाहिए. कहा जाता है कि, अब कोरोना अनलॉक कर्फ्यू का उल्लंघन करने वाली दूकानों की मोबाइल से फोटो खींचकर उक्त दूकानों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा. दूसरी ओर सत्तारूढ़ एवं विरोधी पार्टीयो के राजनीतिक पदाधिकारी अपने राजनीतिक प्रपंचों से बाज नहीं आ रहे हैं. फिर भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती है. 

    राजनीतिक दल कर रहे धरना, प्रदर्शन

    एक ओर सर्वसामान्य जनता के लिए अनलॉक डाउन के सारे नियम लगाये जा रहे. वहीं प्रत्येक राजनीतिक पार्टियों द्वारा नियमों की परवाह किये बगैर वर्तमान में  धरना, आंदोलन, प्रदर्शन किए जा रहे हैं. तब क्या इनके लिए कोई नियम एवं कानून नहीं है ? या  प्रत्येक नियम एवं कानून केवल आम जनता को भुगतना है ? राजनीतिक पार्टियों पर जमावबंदी का कानून लागू नहीं है क्या ? उनके द्वारा जमा की जा रही भीड़ के कारण भविष्य में कोरोना का खतरा नहीं होगा क्या ? राजनीति करने वाले नेता एवं कार्यकर्ता भी इंसान ही है.  उन लोगों से निवेदन है कि, वह अपने साथ आम जनता की भी सुरक्षा का ध्यान रखे एवं जमाबंदी के नियमों का पालन करें अथवा आम जनता एवं व्यापारियों को भी कानून एवं नियमों से मुक्ति दिलाए.