इलाज के अभाव में पशुधन का खतरा बढ़ा

  • अधिकारियों, कर्मचारियों को लगी अप-डाउन की बीमारी

भंडारा (का). कोरोना महामारी के कारण जहां एक तरफ लोगों में भय का वातावरण है, वहीं दूसरी ओर पशुओं में लंपी नामक रोग फैलने से पशुपालन किसानों खासे परेशान हो गए हैं. लंपी रोग से कराह रहे पशुओं को उनकी हालत पर छोड़कर पशु वैधकीय अधिकारी तथा कर्मचारी अपनी सुख सुविधाओं का लालसा को त्याग नहीं पाए हैं.

कोरोना की तरह ही जिले में लंपी रोग का फैलाव हो रहा है. जिस तरह कोरोना ने लोगों को परेशान कर रखा है, उसी तरह लंपी ने पशुओं को परेशान किया हुआ है. जैसे-जैसे लंपी रोगों का फैलाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे उनके पालनकर्ता पशुपालक की चिंता बढ़ती जा रही है. खास बात यह है कि जिस तरह से चीनी विषाणु कोरोना से बचाव के लिए न तो कोई दवा है और न ही कोई टीका है, उसी तरह पशुओं को हुए लंपी के उपचार के लिए कोई टीका या दवा अभी तक सामने नहीं आई है.

दवा न होने के बावजूद कुछ पशु ठीर भी हो रहे है, लेकिन अगर पशुधन विभाग के अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले समय में स्थिति और ज्यादा खराब हो सकती है. जिले में 3 लाख पशुधन हैं. इन पशुधनों में कुछ गाय, कुछ भैंस तथा कुछ अन्य पशु हैं, इन सभी पशुओं को लंपी रोग की चपेट बनाकर उन्हें स्वस्थ्य  पशुओं की कतार में खड़ा करना पशु विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है.