लॉकडाउन के कारण रानमेवा हुआ दुर्लभ : कोरोना के डर से खरीदने से बच रहे लोग

    भंडारा. ग्रीष्मकाल शुरू होते ही शहरी क्षेत्र के लोगों को रानमेवा खरीदने की होड़ मच जाती है. कोरोना के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में वन में जाकर रानमेवा एकत्र करने नहीं जा सके.

    वनक्षेत्र के जंगल में चारं, टेंभर, चिचबिलाई जैसे वन फल यानी रानमेवा की अच्छी खासी उपज होती है. ग्रामीण क्षेत्रों का मजदूर वर्ग हर वर्ष अप्रैल-मई माह में रानमेवा जंगल से इकठ्ठा कर शहरी क्षेत्र में बिक्री के लिए भेजने का शुरु हो जाता है. 

    आमतौर पर जिन रानमेवा की अप्रैल- मई में बहुत ज्यादा मांग रहती थी, इस बार रानमेवा की बाजार में ही मौजूदगी कम होने के कारण ये वस्तुएं बाजार में इसके खरीदार भी बहुत कम हैं.