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    भंडारा. कोरोना महामारी ने जन-जीवन को बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. बहुत से लोगों को हाथ से काम चला गया. बहुत से लोगों को अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ा. पिछले डेढ़ वर्ष में कोरोना महामारी ने सभी को परेशान किया. कर्फ्यू के कारण रास्ते पर वाहन का परिचालन घटने से यह कहा जा रहा था कि दुर्घटनाएं कम होंगी, लेकिन यह बात केवल कहने की ही रही क्योंकि डेढ़ माह की कालावधि में 127 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है.

     वर्ष 2018 में 145 दुर्घटनाएं 

     अगर हम पिछले चार वर्षों में हुई सड़क दुर्घटनाओं के बारे में बात करें तो यह पता चलेगा कि वर्ष 2018 से लेकर 2021 के मई माह तक की कालावधि में सड़क दुर्घटनाओं के ग्राफ में कमी और वृद्धि दोनों ही सामने आई है. वर्ष 2018 में 145 दुर्घटनाएं हुई, जिनमें 104 लोग घायल हुए, जबकि 63 लोगों की मौत हुई. इसी तरह 2019 में 122 दुर्घटनाएं हुईं, इनमें 92 लोग घायल हुए तो 45 लोगों की मौत हुई. 

    2020 में 131 दुर्घटनाओं में 118 लोग 

    उसी प्रकार सन 2020 में 131 दुर्घटनाओं में 118 लोग घायल हुए, जबकि 55 लोगों की मौत हुई. इसी तरह 2021 में मई की कालावधि तक 158 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 185 लोग घायल हुए, जबकि 72 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा. इस वर्ष के पहले लाकडाउन की कालावधि में 108 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 96 लोगों घायल हुए, जबकि  45 लोगों की मौत हुई. दूसरे लाक डाउन में 112 दुर्घटनाएं हुईं. जिनमें 92 लोग घायल हुए तो 48 लोगों की मौत हुई. 

    कोरोना के बढ़ते प्रभाव के कारण केंद्र तथा राज्य सरकार की ओर से कुछ दिनों के लिए यातायात पर प्रतिबंध लगाया गया था, ऐसे में कहा जा रहा था कि वाहनों का परिचालन कम होने से सड़क दुर्घटनाओं पर विराम लगेगा, लेकिन वैसा नहीं हुआ, लाकडाउन के समय में भी सड़क दुर्घटनाएं कम नहीं हुई और लोगों की मौत होने तथा घायल होने का सिलसिला जारी रहा.

    पिछले छह माह में 158 सड़क दुर्घटनाएं हुईं. जो पहले की तुलना में 27 अधिक है. जनवरी से मई 2020 की कालावधि में 55 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. दुर्घटना में मारे गए 72 लोगों में से 11 लोग ऐसे हैं, जो आवश्यकता से तेज गति से वाहन चलाने के कारण मारे गए, जबकि डेंजर ड्राइविंग के कारण 29 लोग, शराब पीने के कारण एक, गलत दिशा से वाहन चलाने के कारण पांच लोगों की मौत हुई. जबकि 26 लोगों की मौत अन्य कारणों से हुई.

    सड़कों की ऊंचाई कम ज्यादा

     महामार्ग पर रास्ते की ऊंचाई कम-ज्यादा होने, रास्तों गड्ढे  होने से भी कई लोगों की मौत होने की जानकारी मिली है. मार्ग पर हुई दुर्घटना का कारण कई बार नियमों को तोड़ना ही बताया गया है. नियमों को तोड़ने में युवक ही सबसे आगे रहे हैं. शराब पीकर वाहन चलाना भी दुर्घटना का प्रमुख कारण रहा है.

    सड़क दुर्घटनाएं न हो यातायात विभाग के साथ-साथ जिला प्रशासन सदैव नियमों का पालन करने का निर्देश देता रहता है. धुमावदार रास्ते, ब्लैक स्पाट के वाहन चलाते समय वाहनों को धीरे चलाने के आग्रह चालकों से किया जाता है, लेकिन युवा वर्ग के वाहन चालक  नियमों का पालन नहीं करते, इस वजह से सड़क दुर्घटनाओं की संख्या में लगातार वृद्धि होती जा रही है.

    रास्तों पर चलने वाले लोगों सबसे ज्यादा सुरक्षित रहे. रास्ता पार करते समय या रास्ते से किनारे से चल रहे किसी व्यक्ति को टक्कर देने की एक भी घटना नहीं हुई.