धूप से सूख रही धान की नर्सरी, महंगा पड़ रहा मोटर से पानी देना, किसान परेशान

    सोनी. तहसील में पिछले कुछ दिनों से बारिश नदारद है. चिलचिलाती धूप के कारण धान की नर्सरी सूखने की कगार पर है. सूखे धान की नर्सरी किसानों की चिंता बढ़ा रही है. धान की नर्सरी को बचाने के लिए किसानों का संघर्ष शुरू हो गया है. इंजन की मदद से पानी देना महंगा पड़ रहा है. तहसील में खरीफ सीजन में 3,281 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की जाएगी. इस वर्ष मृग नक्षत्र में अच्छी बारिश हुई है. बारिश संतोषजनक होने के कारण सिंचाई की सुविधा वाले किसानों ने बुआई शुरू कर दी है.

    डीजल का खर्च बढ़ गया

    सिंचित किसानों की धान नर्सरी बढ़ी है. रोपाई के लिए तैयार है लेकिन पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं हो रही है. बुआई के समय एक बार भारी बारिश हुई थी.  तब से बारिश नदारद है. किसान बारिश का इंतजार कर रहा है. 100 रु. लीटर  पहुंचे डीजल को खर्च कर किसान धान की नर्सरी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. नतीजतन, किसानों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है. कई किसान फसल ऋण लेकर कृषि का विकास करते हैं. किसान चिंतित हैं क्योंकि बोई गई फसलों को बनाए रखने के लिए पर्याप्त बारिश नहीं है. हालांकि किसान संतोषजनक बारिश की प्रतीक्षा कर रहे हैं. 

    इंजन की सहायता से धान की नर्सरी की सिंचाई : नानू राऊत 

    पुयार के किसान नानू राउत ने बताया कि बारिश नहीं होने के कारण हम धान की नर्सरी को इंजन की मदद से पानी दे रहे हैं.  डीजल की कीमत जितनी अधिक होगी, लागत उतनी ही अधिक होती है. लेकिन धान की नर्सरी व रोपाई को बचाने के लिए ऐसा करना होगा.

    आत्महत्या करने की नौबत : संतोष राऊत 

    विहिरगांव के किसान संतोष राउत ने बताया कि पिछले वर्ष प्राकृतिक आपदा के कारण फसल छीन गई थी. भयंकर बाढ़ के कारण आर्थिक स्थिति दयनीय थी. अगर इस वर्ष बारिश नहीं हुई तो आत्महत्या करने की नौबत आ सकती है. यह सोचकर ही आंखों में आंसू आ जाते हैं.