धान खरीदी, मिलींग एवं सरकारी गोदाम में सीसीटीवी

  • वाहनों पर भी सीसीटीवी जरूरी

विजय खंडेरा

भंडारा. अन्न व नागरी आपूर्ति विभाग में पारदर्शिता के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की पैरवी करते हुए धान खरीदी केंद्र के साथ ही धान मिलींग मिल एवं सरकारी अनाज गोदाम में भी सीसीटीवी स्थापित करने का निर्देश अन्न व नागरी आपूर्ति, ग्राहक संरक्षण, सामाजिक न्याय, अल्पसंख्यंक राज्यमंत्री डा. विश्वजित कदम ने बुधवार को जारी किया. जाहिर है कि इस निर्णय का सीधा असर धान उत्पादक भंडारा जिले पर होगा. इस निर्णय की वर्तमान गोखरधंदे पर कोई खास नियंत्रण नहीं होगा. क्योंकि असली हेराफेरी का खेल अनाज की ढुलाई के दौरान ही होता है. ऐसे में अगर पूरी व्यवस्था को दुरुस्त करना हो तो वाहनों को भी सीसीटीवी के दायरे में लाना जरूरी है.

केंद्र एवं गोदाम में सीसीटीवी

बुधवार को मुंबई में राज्य की वितरण व्यवस्था का जायजा लेने के पश्चात डा. कदम ने यह निर्णय जारी किया. कदम का मानना है कि अच्छी क्वालिटी का अनाज का वितरण जनता में भी वितरित होना चाहिए. यह क्वालिटी कंट्रोल का काम सीसीटीवी के माध्यम से हो सकता है.

हकीक़त कुछ और

कदम का मानना है कि खुले बाजार से घटिया माल खरीद कर समर्थन मूल्य केंद्र पर देने के मामले में भी इससे रोक लग सकती है. लेकिन हक़ीकत है कि धान उत्पादक जिले में धान खरीदी केंद्र तक वास्तव में किसान माल पहुंचता ही नहीं. धान खरीदी में देरी, चुकारा मिलने में देरी की वजह से किसान गांव में व्यापारी को नकद में माल बेच देता है. कई जगहों से धान खरीदने के पश्चात व्यापारी किसी एक किसान का सातबारा जोड़कर माल को धान खरीदी केंद्र में खपा देता है. सीसीटीवी के माध्यम से धान खरीदी केंद्र जुड़ने से पूरे व्यवहार पर पैनी नजर रखी जा सकेगी. लेकिन धान खरीदी केंद्र से मिलींग के लिए निकलने वाले वाहन कहां जाते है, माल की किस तरह छंटनी होती है. यह सीसीटीवी के दायरे के बाहर ही रहेगा.  

राशन दुकानदारों को मिलता खराब माल

यह स्थिति सरकारी अनाज गोदाम से सरकारी राशन दुकान तक माल भेजने के दौरान रहती है. राशन दुकानदारों की दबी जबान में शिकायत रही है कि उन्हे बेकार माल मिलता है. अच्छे माल के लिए उन्हे अलग से पैसे देने पड़ते है. अच्छा माल व्यापारियों को बेचा जाता है. जो खुले बाजार की प्रचलित दरों पर ग्राहकों को थमाया जाता है. दूसरी ओर औसत दर्जे का माल सरकारी राशन दुकानदारों को थमाया जाता. जिसके लिए राशन उपभोक्ता एवं राशन दुकानदार के बीच तू तू मैं मैं की नौबत आती थी. ऐसे में सरकारी गोदाम परिसर में सीसीटीवी लगाने के बावजूद राशन दुकानदारों को अच्छा माल मिल मिलने की उम्मीद नहीं के बराबर है. सरकारी गोदाम से माल निकलने के पश्चात  माल दुकान की बजाए व्यापारियों तक पहुंचने की शिकायतें अक्सर आती है. क्योंकि योजनाबद्ध तरीके से रास्ता बदले बगैर ही माल को बीच रास्ते में अन लोड किया जाता है. 

जीपीएस नाकाम, सीसीटीवी कब लगेगा : ओमप्रकाश थानथराटे

सरकारी राशन दुकानदार संघटना के प्रदेश पदाधिकारी ओमप्रकाश थानथराटे ने बताया कि सरकारी गोदाम से अनाज राशन दुकानों तक पहुंचाया जाता है. प्रशासन कहता है कि माल की हेराफेरी रोकने के लिए संबंधित वाहन पर जीपीएस लगाने की घोषणा की गयी थी. अगर यह निर्णय असरदार नहीं रहा है. मार्ग की ट्रैकिंग होने के बावजूद माल व्यापारियों के हाथों में पहुंचता है. अब सीसीटीवी लगाने की बात हो रही है.अब जीओ टैगिंक की बात कही जा रही है कि माल लादने एवं उतारने के समय फोटो निकाले जाएंगे. लेकिन यह तरीका भी असरदार नहीं हो सकता. इसलिए अगर सरकारी राशन की हेराफेरी रोकना हो तो वाहनों पर भी सीसीटीवी से निगरानी करना जरूरी है. यह बात सरकारी राशन दुकानदार संघटना के प्रदेश पदाधिकारी ओमप्रकाश थानथराटे ने कही.

हमारी भी सूनें

राशन दुाकनदार संगठन तालुका अध्यक्ष हितेश सेलोकर के अनुसार राशन दुकानदारों की मांग पर सरकार को गौर करना चाहिए, ताकि वितरण प्रणाली के दोष किए जा सके. सीसीटीवी लगाने एवं जीओ टैगिंग निर्णय अच्छा है. इसे और अधिक विस्तृत करने एवं निर्णय पर शीघ्र अमल में लाने की जरूरत है.

फंड कहां से आएगा

अन्न एवं आपूर्ति विभाग को लंबे समय से देखते आ रहे एक सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि निर्णय पर शीघ्र अमल लगभग असंभव है, क्योंकि अन्न एवं आपूर्ति विभाग के पास में फंड नहीं है. ऐसे में डीपीडीसी से ही फंड की व्यवस्था करनी होगी. भंडारा जिले में इस समय 78 धान खरीदी केंद्र है और 7 तहसील में सरकारी गोदाम है. इतने बडे स्तर सीसीटीवी व्यवस्था के लिए 25 लाख रु. के लगभग खर्च होंगे. इस राशि का प्रबंध कैसे होगा यह अपने आप में बडा सवाल है.