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  • उत्पादन खर्च में तीन गुना बढ़ा

भंडारा (का). भंडारा-गोंदिया इन दोनों जिलों की अर्थ व्यवस्था कृषि पर आधारित हैं. इन दोनों जिलों की मुख्य फसल धान है. लेकिन इन दोनों जिलों के किसान प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ रहा है. पिछले 11 वर्ष में धान के समर्थन मूल्य में केवल 1018 रूपए की वृद्धि हुई है. समर्थन मूल्य की तुलना में धान के उत्पादन खर्च में तीन प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

धान का योग्य समर्थन मूल्य न मिलने के कारण किसानों दिनोंदिन कर्जदार होता जा रहा है. जिले में 2 लाख, 86 हजार खातेदार किसान हैं. जबकि 2 हेक्टर तक खेती रखने वाले किसानों की संख्या डेढ़ लाख के ऊपर हैं. विभक्त परिवार पद्धति के खेती दो भागों में बंट गई.

पिछले 11 वर्ष में धान के समर्थन मूल्य में केवल 1018 रूपए की वृद्धि हुई है. धान के एक एकड़ फसल के लिए 18 से 20 हजार रूपए पहुंच गया है. इस वजह से जो लागत खर्च लगता है, वह भी किसान आसानी से नहीं निकाल पा रहे हैं.

जिले के ज्यादातर किसान कर्जदार हो गए हैं. धान को प्रति क्विंटल 2500 रुपए समर्थन मूल्य देने की मांग यहां के किसानों की ओर से की जाती रही है, लेकिन किसानों की इस मांग पर अभी कर ध्यान नहीं दिया गया है.

धान का उत्पादन खर्च की तुलना में उचित समर्थन मूल्य नहीं मिल रहा, जिससे किसानों में भारी नुकसान सहन करना पड़ रहा है. जिस स्थिति का सामना आज भंडारा, गोंदिया के किसानों को करना पड़ रहा है, उसके आधार पर 2022 कर किसानों की आय दुगुनी कैसे होगी.