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भंडारा. जबसे कोरोना ने पैर परासना शुरू किया है. कोरोना रोकथाम के लिए कई कदम उठाए गए हैं. शहर एवं ग्राम स्तर पर नगर परिषद, नगर पंचायत या ग्राम पंचायत के कंधे पर स्वच्छता एवं अनुशासन बहाली की जिम्मेदारी डाली गयी है. यही कारण है कि इन दिनों स्वराज्य संस्था में अधिकारी कर्मचारी पहले की तुलना में अधिक व्यस्त हैं. शाम होते ही भंडारा शहर में नप की टीम बगैर मास्क पहने राहगीरों को रोककर जुर्माना वसूलते देखी जा सकती है. कार्रवाई के बाद रसीद भी दी जाती है.

नहीं हैं बुक नंबर
लेकिन अब यह रसीदें ही विवाद के घेरे में है. क्योंकि रसीदों पर बुक नंबर ही नहीं है. जिससे जुर्माना वसूली कार्रवाई की आड़ में भ्रष्ट्राचार की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. ऐसे में जिला प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है कि वह नप की सर्वसाधारण तरीके से वसूले जा रहे जुर्माने के तरीके एवं अकाउंटिंग की जांच कराएं.

करोड़ों की वसूली का अंदेशा
कोरोना से निपटने के लिए जब लॉकडाउन 1 लागू किया गया. नप ने शहर में अनुशासन बनाए रखने के लिए सक्रियता दिखाई है. कार्रवाई के नाम पर 100 रुपयों से 5,000 रुपयों तक की वसूली हुई है. लॉकडाउन के दौरान व्यापार संचालन की अनुमति देने के लिए व्यापारियों से प्रति व्यापारी 500 रुपयों वसूली की गयी. इस मामले के तुल पकड़ने के पश्चात वसूली बंद की गयी. तय समय के बाद भी दूकान शुरू करने के आरोप में 5,000 रुपयों की वसूली की जाती है. शहर में बगैर माक्स के लिए 150 रुपयों तक की वसूली की जाती है. एक अनुमान के मुताबिक मोटे तौर पर अगर प्रतिदिन 1 लाख रुपयों वसूली भी मानी जाए तो केवल जुर्माना वसूली के तौर पर नप फंड में 1.5 करोड़ रुपयों का राजस्व जमा होना चाहिए.

1 नंबर की कई रसीदें
शनिवार को भंडारा शहर में जनता कर्फ्यू था. नप कर्मचारी टीम प्रमुख 8 चौराहे में रसीद पुस्तक के साथ मुस्तैद थे. नियम तोड़नेवालों पर कारवाई की गयी, उनसे जुर्माना वसूला गया एवं रसीदें दी गयीं, लेकिन हैरानी की बात है कि रसीद बुक में पुस्तक क्रमांक नहीं था. एक नंबर की कई रसीदें भंडारा में एक ही दिन में फाड़ी गयी.

युनिक नंबर जरूरी
जानकारों के अनुसार यह पूरा मामला संदेहास्पद है. युनिक रसीद नंबर जरूरी है. अगर 1 से 100 नंबर की कई बुक हैं. हर बुक का नंबर जरूरी है, ताकि पता लग सके कि कौनसी रसीद किस बुक की है. अगर बुक नंबरिंग नहीं की है, ऐसे में कोई रसीद बुक अगर गायब की जा सकती है. कैसे पता चलेगा कि कितनी रसीद बुक जारी हुई और कितनी रसीद बुक जमा की गयी.

जिलाधिकारी कराए जांच
जब एक ही नंबर की कई रसीदें पायी जाती हैं, तो उसे रिलायबल ने विश्वसनीय नहीं माना जाता. आडिट की परिभाषा में इसे लैक आफ ट्रान्सफरंसी (पारदर्शिका) का अभाव माना जाता है. जो बेहद ही गंभीर मामला है. संभवना बनती है कि कई रसीद बुक के जरिए भंडारा शहर में जुर्माना वसूला गया, लेकिन एक ही बुक का ब्यौरा जमा किया गया. लोगों ने जिलाधिकारी मामले की जांच कराने की मांग की है.