राजनीति: आगामी समय में होने वाले ZP-पंस चुनाव, नेता कर रहे दल-बदल

    पालांदूर. पालांदूर  जिला परिषद क्षेत्र में शायद ही ऐसा कोई राजनीतिक दल होगा, जिसके एक भी नेता ने जिला परिषद या पंचायत समिति या ग्राम पंचायत सरपंच चुनाव का टिकट न मिलने से खफा होकर दलबदल न किया हो. चुनाव में जिस दल के जीतने की संभावना अधिक होती है, उसमें नेताओं की जाने की संख्या भी अधिक होती है. लेकिन चुनाव में टिकट तो किसी एक को ही मिलता है. ऐसे में टिकट पाने से वंचित रहे नेता अगर पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता हुए तो वे घोषित उम्मीदवार को जिताना अपना कर्तव्य मानते हैं. 

    टिकट की शर्त पर बदलते हैं पार्टी

    पार्टी की रीति- नीति ही उनके लिए सर्वोपरि होती होती है, इसलिए टिकट से वंचित रहने के बाद भी वे पार्टी नहीं छोड़ते हैं. इसके विपरीत प्रत्येक पार्टी में ऐसे नेता भी होते हैं कि जनता की सेवा करने के नाम पर  कहां से वित्तीय लाभ ज्यादा मिलेगा यह देख कर पार्टी बदलने वाले नेता हर जगह मिलते हैं. ऐसे नेता अपने दल के टिकट से वंचित रहने के बाद दूसरे दल से आश्वासन के बाद उसमे शामिल होने में कोई संकोच नहीं करते हैं. इन  नेताओं के लिए अपनी मूल पार्टी के सिद्धांत एवं नीतियां एक मिनट में ही गौण हो जाते हैं, वे टिकट की आस में या टिकट की शर्त पर ही दलबदल करते हैं.

    दलबदल करने वाले कई नेता तो इतने भाग्यशाली होते हैं कि दूसरी पार्टी के टिकट पर भी चुनाव जीत जाते हैं, लेकिन बाकी को जनता भी अस्वीकार कर देती है ओर फिर वे कही के नहीं रहते हैं. दलबदल को प्रोत्साहित करने में राजनीतिक दल भी कम जिम्मेदार नहीं है, ये दल  लालच देकर दलबदल कराने में संकोच नहीं करते. ऐसे उदाहरणों की भारतीय राजनीति में कमी नहीं है और कोई भी दल इसका अपवाद नहीं है, दलबदल करने वाले नेताओं को अपनी पार्टी में तब ही खामियां नजर आने लगती है,जब उन्हें टिकट नहीं मिलता है.

    कई बार अपने दल के हारने की स्थिति में भी नेता दलबदल लेते हैं. कई नेता आर्थिक लाभ के लिए भी दल बदल लेते हैं. दलबदल का कारण सत्ता की बेताबी को भी माना जाता है.  पालांदूर जिला परिषद क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर जिला परिषद सदस्य बनने वाले और बाद में   कांग्रेस  के टिकट पर  सभापति रहने वाले  नेता ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी में प्रवेश किया. उसी तरह राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष   ने भाजपा में प्रवेश किया और अगले कुछ ही दिनों में  कहीं युवा नेता पार्टी दल-बदल करने वाले हैं ऐसी चर्चा गांव में की जा रही है. 

    वित्तीय लाभ का मौका ढूंढते हैं

     जिला परिषद क्षेत्र के लोगों का कहना यह है कि सभी नेतागण वित्तीय लाभ खुद को पहुंचाने के कारण या रास्ते, नालो और अन्य ठेके मुझे मिलना चाहिए इसलिए पार्टीयो में दल बदल कर रहे हैं. सभी नेता क्षेत्र या गांव का विकास हो इसलिए पार्टी नहीं बदलते हैं, में किस प्रकार चुनकर आऊंगा यह देखकर ही पार्टी बदलते हैं, ऐसा दिखाई दे रहा है.