सार्वजनिक कुएं की बिक्री! वरठी में लोगों की आपत्ति पर ग्रापं ने लगाई रोक

    वरठी. जमीन एवं पैसों की भूख के आगे नैतिकता का कोई स्थान नहीं बचता. जब व्यवस्था कमजोर स्थिति में होती है. दबंदई अपना कमाल दिखाती है. मेरा कौन क्या बिगाड़ पाएगा की मानसिकता अच्छाई और बुराई का फर्क नहीं कर पाती है. पूर्व के जमाने में प्रत्येक जीव को पानी मिले इस पवित्र उद्देश्य से सार्वजनिक कुएं बनाए गए.

    बाद के क्रम में घर-घर तक नल योजना द्वारा पानी पहुंचने लगा और सार्वजनिक कुएं अपना महत्व और अस्तित्व दोनों खो बैठे. बस यही स्थिति थी कि जमीन के भूखे लोगों ने कुओं पर अपना अतिक्रमण कर दिया. कई जगह कुएं मटियामेट कर दिए गए. मगर वरठी में एक चौकानेवाला मामला सामने आया है, जब भूमि विक्रेता अपनी वास्तविक जमीन से ज्यादा जमीन का सौदा किया. उसने इसके लिए अपनी जमीन से सटे सरकारी कुएं को भी अपनी मालकियत का बताया एवं बिक्री का सौदा किया. 

    लोगों को कहना है कि अगर लोगों ने आवाज नहीं उठाई होती तो जमीन सौदे के पश्चात जमीन फेरफार की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती. व्यवस्था एवं सार्वजनिक जीवन में नैतिकता को अंगूठा दिखा रहे इस मामले से प्रशासन में हड़कंप मचा है.  

    वरठी शहर के गट क्रमांक 500/1 में 500/1/30 गट नंबर में सरकारी कुआं स्थित है. जमीन मालिक ने जो बिक्री सौदा किया है, उसमें चतुर्सीमा में दक्षिण में पक्का कुआं का जिक्र है. जमीन विक्रेता ने इस सरकारी कुएं को भी अपना बताया एवं सौदा पूरा किया. 

    सरकारी रिकार्ड 7/12 के अनुसार मूल जमीन मालिक के नाम पर 1.51 आर हेक्टेयर जमीन है. जबकि बिक्री सौदा 1.66.87 हेक्टेयर आर का किया गया है. यानी 0.15 हेक्टेयर आर सरकारी जमीन को जमीन मालिक ने अपना बताकर बेच दिया है, चूंकि यह पूरा मामला लेआउट धारकों के ध्यान में आया. उन्होंने सरकारी जमीन पर निर्माण से नए भूमिस्वामी को रोका. मामला बढ़ा नए भूमि कागज दिखाकर दावा किया यह जमीन भी अब उसी की है, क्योंकि उसने इसके लिए भी पैसे दिए हैं. जमकर बहसबाजी हुई एवं मामला ग्राम पंचायत तक पहुंचा. अब इस मामले के बारे में लोगों ने तहसीलदार को भी सूचित किया है.

    सरकारी जमीन का सौदा गैरकानूनी 

    इस मामले में रूपेश रघुते अपनी आपत्ति जताते हुए कहा कि सरकारी जमीन का सौदा करना पूरी तरह से गैरकानूनी है. सरकारी भूमि पर सभी का सामूहिक अधिकार है. वहां निर्माण कार्य ग्रापं ही कर सकती है. जिससे अब आवश्यक है कि ग्रापं इस भूमि को अपने कब्जे में लें. 

    फेरफार पर रोक : सरपंच 

    ग्राम पंचायत का पक्ष रखते हुए सरपंच श्वेता येलने ने कहा कि नए भूमिस्वामी ने फेरफार के लिए ग्रापं को आवेदन दिया था. मगर जब परिसर के लोगों ने इस मामले में आपत्ति दर्ज की. फेरफार को रोका गया है.