Chakradhar Swamy

भंडारा (का). महानुभाव पंथ के महापुरुष चक्रधर स्वामी का भंडारा शहर में वर्षो पूर्व आगमन हुआ था. उनकी पावन स्मृति का जतन करने वाले तीन स्थल है. देश भर में इस समाज से जुड़े लोगों की अच्छी खासी संख्या है. महानुभाव पंथ से जुड़ा एक स्थल भंडारा के खामतालाब के तट पर स्थित दत्त मंदिर तथा पंचदेवली मंदिर का पिछले तीन वर्षो में जीर्णोद्धार किया गया है. जीर्णोंद्धार के कारण महानुभाव पंथ के तीर्थस्थल का कायाकल्प ही हो गया है. नया रूप रंग मिला है.

12वीं शताब्दी में आए थे
संत चक्रधर स्वामी भ्रमण करते हुए 12वीं शताब्दी में भंडारा आए थे. इस बात ता उल्लेख महानुभाव पंथ के पुराने ग्रंथ में मिलता है. उस वक्त भंडारा शहर की पहचान एक छोटे से गांव के रूप में थी. स्वामी गांव में भीक्षा मांगने के लिए निलोभट्ट भंडारेकर के घर गए. वह घर वर्तमान में भंडारेकर का घर श्याम खुराना के मालिकाना हक का है. यह जगह स्वामी के भंडारा शहर में पहली बार भेंट देनेवाली है. इस जगह को पानी पात्र स्थान नाम दिया गया है. शहर में आने वाले श्रद्दालु सबसे पहले यही आते हैं और नमन करने के बाद आगे की ओर कूच करते हैं. 

भीक्षा लेकर तट पर आए
चक्रधर स्वामी भीक्षा लेकर देवकी तालाब के तट पर आए,  वहां पंचदेवली नामक एक छोटा मंदिर था. कालांतर में तालाब के स्वरूप में बदलाव होता चला गया. शहर की पंच कमेटी ने श्रद्धालुओं के सहयोग से वहां छोटे से एक मंदिर की स्थापना की. तालाब के सौंदर्यीकरण में इन मंदिर में जाने के लिए शीतला माता मंदिर के बगल से एक रास्ता बनाया गया. चक्रधर स्वामी ने तालाब के पश्चिमी तट पर विश्राम किया. इसी जगह उन्होंने निलोभट्ट भंडारेकर को अध्यात्मिक ज्ञान तथा उपदेष प्रदान किया. इसके बाद भंडारेकर ने स्वामी चक्रधर स्वामी के साथ भारत भ्रमण किया. इसी स्थान पर बाद में महानुभाव पंथ के अनुयायियों ने दत्त मंदिर की स्थापना की. 

सहानी ने किया सहयोग
3 वर्ष पूर्व चंड़ीगढ़ (अंबाला) के अनिल सहानी के सहयोग से दत्त मंदिर का जिणोद्धार किया गया. पंचदेवली मंदिर तथा दत्त मंदिर की देखरेख पंचकमेटी के पदाधिकारी करते हैं.  दर्शन के लिए बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुख सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पंच कमेटी सदैव कार्यरत रहती है. यह जानकारी यहां के भक्त प्रकाश डोंगरे तथा प्रवीण बडवाईक ने दी है.