धोबी-परीट समाज का आरक्षण चक्रव्यूह के घेरे में

भंडारा (का). केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्रालय ने राज्य सरकार को आरक्षण के संदर्भ में एक प्रस्ताव जारी किया. इस प्रस्ताव में धोबी समाज के आरक्षण संबंधी जानकारी भरकर भेजने की अपील की गई थी, लेकिन प्रस्ताव भेजकर 9 माह की कालावधि बीच जाने के बाद भी राज्य सरकार ने वह प्रस्ताव कोरा ही रखा. इस वजह से राज्य के धोबी तथा परिट समाज के आरक्षण में राज्य सरकार ही बाधक बनी हुई है, ऐसा आरोप महाराष्ट्र राज्य धोबी-परीट महासंघ (सर्व भाषिक) ने लगाया है.

धोबी समाज को अनुसूचित जाति में समाविष्ट किया जाए, इस मांग को लेकर विगत 70 वर्ष से धोबी समाज सरकार से टकरा रही है. बार- बार आंदोलन करने के बाद सन् 2002 में भांडे समिति का गठन किया गया. इस समिति ने धोबी तथा परिट समाज को अनुसूचित जाति में समाविष्ट करने की सिफारिश करके उसकी रिपोर्ट केंद्र को भेजने के आदेश दिए थे. सन् 2015 में इस प्रस्ताव को एक बार फिर केंद्र सरकार के पास भेजा गया.

केंद्र सरकार के इसके प्रति सकारात्मक होने के बावजूद राज्य सरकार की ओर से समय निकाला जा रहा है. केंद्र सरकार की ओर से इस मसले पर चर्चा होने के बाद 4 सितंबर, 2019 को केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय विभाग ने महाराष्ट्र सरकार के साथ धोबी-परिट समाज को आरक्षण देने के संदर्भ में पत्र व्यवहार किया.

इस पत्र व्यवहार में उन्होंने धोबी समाज के आरक्षण के बारे में जानकारी देने की अपील की थी.यह प्रस्ताव एक विहित प्रारुप में तत्काल भेजने के लिए कहा गया है. इस अपील के बाद 9 माह की कालावधि गुजर चुकी है, लेकिन उक्त प्रस्ताव के प्रारूप को जानकारी के साथ भेजा नहीं गया.