Sarpanch

अडयाल-चिचाल. ग्रापं क्षेत्र में विकास कार्य करते समय भरोसे में नहीं लेना, नियम के बाहर विकास कार्यों का निर्माण करना, ग्रापं पदाधिकारियों के साथ नागरिकों का अपमान करने सहित अन्य आरोपों के लिए एक महिला सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने एक ग्राम सभा की मांग की गई थी. जिसके मुताबिक जिलाधिकारी ने आयोजन को मंजूरी दी, किंतु जिला सरपंच संगठन ने मंजूर नियमों के बाहर होने का आरोप लगाया. इससे अडयाल की महिला सरपंच के अविश्वास के कारण विवाद पैदा हो गया है.

1 महीने के भीतर विशेष ग्रामसभा जरूरी

सरकार ने ग्राम विकास के संदर्भ में ग्रापं को विशेष महत्व दिया है. मामलों में अविश्वास का उपयोग कई गांवों के सरपंच पर झूठे आरोप लगाकर किया जाता है. इस बीच समय पर विकास कार्य रूक जाता है, जो गांव के विकास में बाधक है. पवनी तहसील का अडयाल गांव में हुआ है. यह बात जिला सरपंच संगठन के पदाधिकारियों ने व्यक्त की. उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव को लेकर हुई बैठक के फैसले के बाद 1 महीने के भीतर विशेष ग्रामसभा आयोजित करने का प्रावधान है. ऐसे मामले में 2 महीने के बाद आरोप लगाए जाने के बाद प्रशासनिक कार्यों पर सवाल उठाकर राजनीतिक दबाव के कारण हो रहा है, ऐसा आरोप सरपंच संगठन के पदाधिकारियों ने भी लगाया था. जिसने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. 

सवालों के घेरे में ग्रामसभा

एक प्रश्न का उत्तर देते हुए पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2017 में आयोजित ग्रापं के आम चुनाव में सरपंच पद के लिए लोगों से सीधे चुने थे. अविश्वास के समय 2 वर्षों की अवधि पूरी करने का प्रावधान है. राज्य में महागठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान कोविड-19 वैश्विक महामारी के मद्देनजर ग्राम सभा को रद्द करने का आदेश दिया गया है. ऐसे मामले में अविश्वास के लिए बुलाई गई ग्रामसभा विसंगतियों को पैदा करने वाली हैं, क्योंकि यह नियमों से बाहर हैं. यह कहते हुए कि एक पुरानी तरीके से आयोजित ग्राम सभा को पदाधिकारियों की ओर से निषेध कर दिया गया है. 

…अन्यथा न्यायालय में जवाब मांगेंगे

सरपंच जयश्री कुंभलकर के साथ हुए अन्याय के खिलाफ अथवा यहां तक ​​कि ग्राम सभा के खिलाफ सरपंच महासंघ कोर्ट जाने की राह पर है. पवनी तहसील में बुलाई गई पत्र-परिषद में यादव मेंगरे, दीपक तिघरे, सरपंच सदाशिव ढेंगे, अनिता गिरेपुंजे, नूतन कुर्झेकर, सरपंच जयश्री कुंभलकर, सरपंच सतीश घरडे, सरपंच शरद तिघरे, सरपंच राजु तलमले, सरपंच किशोर ब्राम्हणकर, सरपंच मोहन घोगरे, सरपंच नितिन कोदाणे आदि उपस्थित थे.