गन्ना उत्पादक किसान परेशानी में

भंडारा (का). हर ओर कोरोना महामारी का संकट है,  इस संकट से खुद को बचाने के लिए सभी अपनी-अपनी तरफ से कोशिश कर रहे हैं. कोरोना के संकट के बीच जिले के गन्ना उत्पादक किसानों के समक्ष आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है. पिछले दिनों आई बाढ़ ने तो गन्ना उत्पादकों में पूरी तरह से तबाह कर दिया. बाढ़ के पानी में गन्ने बहने के कारण किसानों का संकट और ज्यादा बढ़ गया.

कभी आस्मानी तो कभी जिला प्रशासन की ओर से खड़ी की जा रही परेशानियों के कारण गन्ना किसानों को पूरी तरह से तोड़ा गया. चीनी कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के हाथ में काम न होने के कारण उनके समक्ष भी भुखमरी का संकट उत्पन्न हो गया है. इन मजदूरों को पिछले पांच माह से वेतन ही नहीं मिला है. तंग आर्थिक संकट में परिवार का पेट कैसे पाला जाए, इस चिंता न गन्ना किसानों की नींद ही उड़ा दी है. पहले के वैनगंगा चीनी कारखाने का नाम बदलकर मानस ऐगो कर दिया गया है. इस कारखाने के पास डेढ़ माह का साढ़े तीन करोड़ रूपए का किसानो का चुकारा लंबित है, इस चुकारे का भुगतान कब होगा, इसके बारे में खुले तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है. उल्लेखनीय है कि धान उत्पादक किसानों को अच्छा भाव मिला है और धान उत्पादक किसानों बोनस भी मिला है, जबकि गन्ना उत्पादकों को गन्ना पक कर तैयार होने के बाद भी अभी तक गन्ने के पैसे नहीं मिले हैं.