गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तले दबे शिक्षक, विद्यादान कम और बाबूगिरी का काम ज्यादा

    भंडारा. सैकड़ों प्रकार के अशैक्षणिक कार्य शिक्षकों को करने पड़ते हैं. इस कारण शिक्षकों को कष्ट हो रहा है. बीएलओ, सूची मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची अद्यतन आदि का कार्य, आनलाइन जानकारी भरना, यू डायस, स्कूल उपलब्धि सहित सरल, इस प्रणाली के लिए जानकारी प्रदान करना एक कठिन कार्य है. शिक्षक छात्र निर्माण से अधिक अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तले दबे हैं. 

    छात्रों का होता है शैक्षणिक नुकसान

     आनलाइन प्रणाली के तहत छात्र, शिक्षक व स्कूलों से संबंधित 250 से अधिक प्रकार की जानकारी कम्प्यूटर में भरनी होती है. स्कूल पोषाहार आहार, मध्याह्न भोजन का सामान जमा करने से लेकर उसका हिसाब-किताब, प्रत्यक्ष लाभार्थी अंतरण योजना के तहत स्कूल ड्रेस, पाठ्य पुस्तकें, अल्पसंख्यकों के लिए विभिन्न योजनाएं, पिछड़ा वर्ग, छात्रों को सरकार की ओर से सीधे रियायती राशि, अभिभावकों के खाते में जमा किया जाता है. राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खोलना, आधार से लिंक करना, आदिवासी, प्रवासी श्रमिक वाले माता-पिता से मिलना, छात्रों का आधार कार्ड जारी करना, पिछले कुछ वर्षों में 500 से अधिक शिक्षकों को विभिन्न प्राधिकरणों में नियुक्त किया गया है. ये शिक्षक अधिकारियों के आदेश पर कई काम करते हैं. इन शिक्षकों के स्थान पर कोई अन्य शिक्षक नहीं होने से छात्रों को शैक्षणिक नुकसान होता है. 

    शिक्षकों को सौंपे जाते हैं विभिन्न कार्य

    विभिन्न छात्रवृत्ति, परीक्षा आवेदन पत्र भरना, विभिन्न राज्य व केंद्र स्तर की छात्रवृत्तियां, 10वीं परीक्षा आवेदन आनलाइन भरना, निजी संस्थान व विभिन्न स्कूल उपक्रमों के लिए लोगों द्वारा वित्तीय धन जमा करने, विभिन्न वर्षगांठ, अभियान, उपक्रमों को मनाने के अलावा शिक्षक भी काम कर रहे हैं. टीकाकरण केंद्र को जानकारी उपलब्ध कराने व कोविड काल में शिक्षक टीकाकरण केंद्र पर काम कर रहे हैं. शिक्षकों को विद्यादान से ज्यादा बाबूगिरी का काम करना पड़ रहा है. 

    जिस स्कूल में कक्षा 1 से 4 तक है. उस विद्यालय में अधिकतम एक ही शिक्षक है. इस स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षक पढ़ाए या गैर-शैक्षणिक कार्य करें, यह सवाल उस अकेले शिक्षक का है. नतीजतन शिक्षक को रात के दौरान घर से काम करना पड़ता है. अधिकारियों की बैठक में शामिल नहीं हो सकते हैं. यदि वह किसी सभा में जाते हैं, तो उन्हें विद्यालय से अनुपस्थिति की छुट्टी लेनी पड़ती है.

    प्रत्येक विद्यालय में अन्य कार्यों के लिए एक शिक्षक 

    चूंकि गैर-शैक्षणिक कार्यों का भार प्रत्येक विद्यालय पर है, इसलिए उस विद्यालय के शिक्षक गैर शैक्षणिक कार्य एक शिक्षक को सौंपकर उस शिक्षक की कक्षा लेने को तैयार रहते हैं. स्कूल में सात में से एक शिक्षक केवल गैर-शैक्षणिक कार्य करता हैं क्योंकि शिक्षक शैक्षणिक कार्य के अलावा दूसरा काम नहीं कर सकते हैं.