ब्रिटिशकालीन नहर की हालत खस्ता

सिहोरा. क्षेत्र में 12 हजार हेक्टर खेती को सिंचाई के लिए पानी दिया जाता है. जो मध्यम प्रकल्प चांदपूर के नाम से है इसके बाद पाटबंधारे विभाग निर्माण किया गया और इस विभाग में दो शाखा अभियंता और कर्मचारी नियुक्त किये गये है. दोनो विभाग में प्रति 6 हजार हेक्टेअर खेती सिंचाई करणे की जिम्मेदारी दि गई है.

तालाब का नहर ब्रिटिशकालीन होने का पाटबंधारे विभाग ने शासन को इसकी जानकारी दीं. तालाब की देखभाल-दुरुस्ती अभी तक करने में आयी नहीं है. मलबा साफ करने का काम नही होने से प्रति वर्ष मलबा जमा होता है. इस दरम्यान तालाब का पानी बाटने वाले नहर जर्जर हो गये है. नहर मे पेड के पत्ते गिरने से नहर बुजते जा रहे हैं. इस वजह से नहर का मजबुतीकरण नही हुआ है. नहर को सिमेंट अस्तरीकरण भी किया गया नही है. आउटलेट टुटे होने से पानी रोकना मुश्किल हो रहा है. इस वजह से पाणी नदी नालो को बहते नजर आ रहा है. पाटबंधारे विभाग के पास निधी होने के बावजूद काम करने के लिए मंजुरी नही दी जा रही है. 

खेती अधिग्रहित लेकिन नहर के काम नही

बपेरा गाव में दो नदी के संगम किनारे पर जय किसान जलसिंचन प्रकल्प किसानों ने स्थापन किया हुआ था. प्रकल्प मे देवसर्रा, सुकडी, गोंडीटोला, बपेरा, खेत परिसर में जोडणी आयी हुई थी. किसान के हाथ में इस प्रकल्प की बागडोर थी. योजना का चालक-मालक किसानों को गन्ने की खेती करने का लालच देने के बाद पुरा करोबार चौपट हो गया. बिजली बिल का बकाया बढने से  योजना बंद करने का समय आ गया. प्रकल्प में आनेवाली खेती पाटबंधारे विभाग ने अधिग्रहण की लेकिन कैनल के काम को नये से करने में आये नहीं. आउटलेट और नहर को सुधारने का काम जल्दी शुरू करने की मांग सुभाष बोरकर भाजपा किसान संघ तालुकाध्यक्ष ने की है.

परेशानी झेलनी पडती है – सतीश चौधरी  

तुमसर कुउबास के संचालक सतीश चौधरी ने कहा कि नहर की खस्ताहालत व पाटबंधारे विभाग की ओर से काम नहीं किए जाने से पानी के समय किसानों को परेशानी झेलनी पडती है.