Lockdown Updates : Dangerous form of corona in Mizoram, complete lockdown in AMC area amid rising Covid-19 cases
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    तुमसर. जिले के साथ ही शहर में सोमवार से जारी की गई पाबंदी की वजह से शहरी क्षेत्र के विशेष तौर पर छोटे व्यापारी एवं होटल रेस्टोरेंट में मजदूरी करने वाले लोगों के लिए पाबंदियां संकट की घड़ी बन कर आयी हैं. वही मध्यमवर्गीय परिवार अभी आर्थिक संकट से उभरने वाला था कि इन पांबदियों से उसके हालात और गहराने लगेगा.

    अब तक यह देखने को मिला है कि शहर के अनेक राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों द्वारा गरीबों में भी सबसे अधिक गरीब परिवारों को भोजन एवं राहत सामग्री मुहैया करवाई जाती थी, तो दूसरी ओर देश में अच्छी स्थिति हो, खराब हो अथवा सामान्य हो हमेशा मध्यमवर्गीय परिवार संघर्ष करते हुए नजर आता है फिर भी सरकार द्वारा उनके लिए कोई भी विशेष योजना अथवा उनकी ओर ध्यान नहीं दिया जाता है. 

    मध्यमवर्गीय परिवार को अपने बच्चों को अच्छे से पढ़ाना, अच्छा खाना खिलाना, अपना स्टेटस मेंटेन करना, इन सबके बीच में कई प्रकार के सरकार को टैक्स देने पड़ते हैं. हर स्थिति में इनके खर्च लगे रहते हैं. कमाई का जरिया खत्म हो जाने के बाद भी खर्च वहीं के वहीं रहते हैं एवं वह ऐसी स्थिति में रहते हैं कि किसी को कुछ बोल भी नहीं सकते है कि मुझे जरूरत है ऐसे लोगों के लिए सरकार के तरफ से हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाने चाहिए एवं इनकी जानकारी गुप्त रखते हुए इनकी यथासंभव मदद होनी चाहिए. 

    यहां श्रमजीवी वर्ग तो अपनी दिक्कतों को जुबान से बयान करके मदद मांग भी लेता है, लेकिन शहर में कई ऐसे मध्यमवर्गीय परिवार हैं, जो अपनी आवश्यकताओं को किसी से कह भी नहीं पाते हैं ऐसे में मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने संकट की घड़ी में खाने को लाले पड़ जाते है. 

    संकट में सरकार से उम्मीद

    कोरोना संकट के बीच जब मध्यम वर्ग सरकार से राहत की उम्मीद लगाए बैठा है तब मध्यमवर्गीय परिवार का कौन बनेगा सहारा? यह सवाल खड़ा होता है जो लोग नौकरी पेशा हैं, उनको वेतन मिल जाएगा लेकिन जो लोग अपनी दूकान, दफ्तर या छोटा व्यापार समय से बन्द करके घर बैठेंगे उनका घर कैसे चलेगा, क्या उनको भी मदद नहीं मिलनी चाहिये. 

    प्रत्येक आपदा में अमीर वर्ग खुद खा लेता है एवं गरीब को सरकार खिला देती है, लेकिन प्रत्येक आपदा में मध्यमवर्गीय ही पिसते रहता है.